बिना समीक्षा के अचानक जमीन गाइडलाइन दर बढ़ाना जनता पर अत्याचार है…

भाजपाई नेता, मंत्री, विधायक अपनी काली कमाई सफेद करने गाइडलाइन की दर अनाप-शनाप बढ़ा दिये

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार ने अतार्किक तरीके से मनमाने ढंग, जमीनों की नई गाईडलाईन दर का निर्धारण किया है। न किसी से चर्चा, न सुझाव, न ही दावा आपत्ति का अवसर, अचानक अनुचित फैसले थोप दिये गये। अचानक से जमीनों की सरकारी कीमत 10 से 100 प्रतिशत बढ़ा दिया, मतलब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आने के बाद भूमि की सरकारी कीमत 40 से 400 प्रतिशत बढ़ गयी, इससे जमीन व्यवसाय ठप्प हो गया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि शेरों की सीमा से 20 किलोमीटर के दायरे में यदि कोई किसान अपनी एक एकड़ जमीन बेचना चाहे तो पहले 15000 फीट पर स्क्वायर फीट के हिसाब से रजिस्ट्री शुल्क और स्टैम्प ड्यूटी लगेगा यदि तीन भाइयों की सम्मिलात जमीन हो तो 15 -15 हजार के तीनों हिस्सेदारों के हिस्से अर्थात पूरे एक एकड़ पर वर्गफिट के हिसाब से लगेगा, लेकिन वहीं जमीन यदि सरकार अधिग्रहीत करे तो किसान को मुआवजा हैक्टेयर के हिसाब से दिया जाएगा, ये कैसा न्याय है? यही नहीं कुछ स्थानों पर 30 लाख की जमीन के लिए 22 लाख की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क ऐसा उदाहरण दुनियां में कहीं नहीं।

रायपुर शहर के आसपास ऐसी भी स्थिति बन गयी है कि अगर कोई 1000 फीट जमीन की खरीदी 6 लाख रु. में करता है तो उसे 4 लाख 40 हजार रु. रजिस्ट्री शुल्क चुकाना होगा, कुछ क्षेत्रों में रजिस्ट्री शुल्क और जमीन की कीमत एक बराबर होगी, कुछ क्षेत्रों में जमीन की कीमत से ज्यादा रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ेगा। ऐसे गरीब आदमी मकान कैसे बनायेगा? तिनका तिनका जोड़कर और कर्ज लेकर जमीन खरीदने वालों को जमीन के साथ रजिस्ट्री के लिए भी कर्ज लेना पड़ेगा, फिर मकान बनाने पैसा कहाँ से इंतजाम करेगा?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह निर्णय किसान विरोधी है इस निर्णय से किसान की जमीन नहीं बिकेगी, मान लो उसने जमीन बेच दिया जरूरत के खर्च के बाद जब वह दूसरी जमीन खरीदना चाहेगा तो उसे ज्यादा स्टांप ड्यूटी पटाना पड़ेगा। किसानों को दोनों तरफ से नुकसान है, किसान न जमीन बेच पायेगा न खरीद पायेगा।

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