पटना / संदीप सिंह : खबर आलोक टीम
बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच लोक आस्था के महापर्व छठ का आगाज़ हो चुका है।
जहाँ राजनीतिक मंचों पर नेता जनता का मन जीतने में लगे हैं, वहीं पूरे बिहार में छठ मइया के गीतों और श्रद्धा की गूंज सुनाई दे रही है।
आज महापर्व के दूसरे दिन खरना की तैयारियाँ पूरे जोरों पर हैं।
छोटे से छोटे बाजार और दुकानों में छठ पूजा से जुड़ी वस्तुओं की खरीददारी हो रही है — मानो ऐसा प्रतीत होता है कि दिवाली से भी ज़्यादा खरीदी छठ में की जा रही है।
बाजारों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
राजधानी पटना से लेकर सीवान, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा और छपरा तक — हर जगह बाजारों में जबरदस्त भीड़ देखी जा रही है।
पूजा सामग्री, टोकरी, सुपली, फल, गुड़, गन्ना, नारियल, सिंघाड़ा और केले की मांग अपने चरम पर है।
दुकानों पर ग्राहकों की इतनी भीड़ है कि कई जगहों पर ट्रैफिक पुलिस को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है।
बाजारों में रौनक देखकर ऐसा लगता है मानो पूरा बिहार उत्सव के उमंग में डूबा हुआ है।
लोग खरीददारी के साथ-साथ एक-दूसरे को छठ की शुभकामनाएँ भी दे रहे हैं।
प्रवासी बिहारी लौटे घर, आस्था में डूबे गाँव-शहर
दिल्ली, मुंबई, सूरत, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में काम करने वाले हजारों बिहारी अपने गाँव-घर लौट आए हैं।
वे घर आकर आराम करने के बजाय परिवार के साथ छठ की तैयारियों में जुट गए हैं —
कोई घाट सजाने में मदद कर रहा है, तो कोई पूजा सामग्री जुटाने में।
गाँवों में युवा, महिलाएँ और बच्चे मिलकर घाट की सफाई और सजावट कर रहे हैं।
हर गली-मोहल्ला छठी मइया के गीतों से गूंज रहा है —
“केलवा जे फरेला घवद से ओ पिया, केलवा जे फरेला घवद से…”
खबर आलोक टीम की जमीनी कवरेज
खबर आलोक की टीम ने बिहार के अलग-अलग जिलों — पटना, मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा — में जाकर लोगों से बातचीत की।
लोगों ने बताया कि छठ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावना, एकता और बिहारी पहचान का प्रतीक है।
एक स्थानीय व्रती ने कहा —
“छठ में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सब मिलकर घाट सजाते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं — यही असली बिहार है।”
टीम ने घाटों पर चल रही तैयारियों, बाजारों की चहल-पहल और श्रद्धालुओं की भावनाओं को कैमरे में कैद किया है।
रिपोर्ट जल्द ही खबर आलोक पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित की जाएगी।
बिहार में आस्था का माहौल, पूरे विश्व में गूंज छठ की महिमा
बिहार ही नहीं, बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, नेपाल, मॉरीशस, अमेरिका और लंदन तक छठ महापर्व की गूंज सुनाई दे रही है।
विदेशों में बसे बिहारी समुदाय ने भी स्थानीय घाटों पर छठ की शुरुआत कर दी है।
जहाँ भी बिहारी हैं, वहाँ छठ की परंपरा और भक्ति की लौ जल रही है।
निष्कर्ष
छठ महापर्व सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, यह बिहार की आस्था, एकता और आत्मगौरव का प्रतीक है।
इस बार जब चुनावी माहौल में राजनीति अपनी राह पर है,
तो दूसरी ओर छठ मइया का पर्व हर दिल को जोड़ने का काम कर रहा है।
जय छठी मइया 🙏 | जय बिहार 🌾 | जय आस्था 🇮🇳




