“ज़िंदगी के बाद भी जीवन बचाने का संकल्प” भिलाई से निकला मानवता का अनोखा संदेश..
सेक्टर-9, भिलाई में जवाहरलाल नेहरू अस्पताल और अनुसंधान केंद्र” में अगस्त 2025 में आयोजित “विश्व अंगदान महोत्सव 2025” ने पूरे शहर का ध्यान खींच लिया। इस आयोजन में BSP की डिप्टी मैनेजर गलामिका पटेल ने एक ऐसा संदेश दिया , जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को गहराई से प्रभावित कर दिया।
अपने दमदार व्यक्तित्व और दिल को छू लेने वाले शब्दों से गलामिका ने कहा – “मेरी माँ और मैं मृत्यु के बाद अपना शरीर दान करने के लिए तैयार हैं। हम चाहते हैं कि हमारी मौत व्यर्थ न जाए, बल्कि हमारे अंग किसी और की ज़िंदगी की रोशनी बनें।”

भारत जैसे विशाल देश में लाखों लोग किडनी, लिवर, हार्ट और कॉर्निया ट्रांसप्लांट के इंतजार में जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि,हर 10 लाख लोगों में सिर्फ 0.5 लोग ही अंगदान के लिए आगे आते हैं। ऐसी स्थिति में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसी उद्देश्य से Jawaharlal Nehru Hospital ने इस भव्य आयोजन की शुरुआत की।
अगर समाज से उपेक्षित समझे जाने वाले Transgender लोग भी अपने शरीर को मृत्यु के बाद दान करने के लिए आगे आ सकते हैं, तो बाकी लोग क्यों पीछे हटें? अगर हम जैसे लोग हिम्मत दिखा सकते हैं, तो यह कदम हर किसी को उठाना चाहिए।”
उन्होंने महर्षि दधीचि का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अपनी हड्डियाँ दान कर धर्म की रक्षा की थी। Ms. Glamika ने इस प्रेरक कथा को आज के दौर से जोड़ते हुए कहा कि “जब धर्म और समाज के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी संभव थी, तो आज मानवता के लिए मृत्यु के बाद अंगदान करना तो हमारा कर्तव्य होना चाहिए।”