राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं, छोटे दलों की नाराज़गी और गठबंधन की रणनीति चर्चा में
अखिलेश सिंह बंटी,पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी सीटों का बंटवारा कर दिया है। इस बार भाजपा और जदयू बराबरी के साथ 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि चिराग पासवान की LJP (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं। वहीं जीतन राम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 6-6 सीटें दी गई हैं।
यह सीट शेयरिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के चुनाव में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा और 74 सीटें जीतकर बढ़त बनाई थी, जबकि जदयू ने 115 सीटों में से केवल 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
छोटे दलों की भूमिका और रणनीति
HAM और कुशवाहा की पार्टी को मिली कम सीटें राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हैं।
चिराग पासवान की LJP(R) अब NDA का हिस्सा है, जबकि उनकी पार्टी 2020 में अकेले चुनाव लड़ी थी और महज 1 सीट पर जीत हासिल की थी।
NDA का यह फॉर्मूला संकेत देता है कि बड़े दलों के साथ छोटे गठबंधन दलों को भी निर्णायक भूमिका दी गई है, ताकि विरोधी दलों के सामने गठबंधन एकजुट दिखे।
राजनीतिक समीकरण और चुनौती
छोटे दलों में संतोष बनाए रखना NDA के लिए बड़ी चुनौती है। HAM के नेताओं ने पहले से नाराज़गी जताई है कि उन्हें अपेक्षित सीटें नहीं मिली हैं।
भाजपा और जदयू के लिए भी यह संतुलन जरूरी है ताकि गठबंधन के भीतर “भाई-भाई” वाला झगड़ा न दिखे।
बिहार के विभिन्न इलाकों में जातीय समीकरण, ग्रामीण मुद्दे और प्रत्याशियों की लोकप्रियता इस चुनाव की दिशा तय करेंगे।
भविष्य की राह और संभावित असर
NDA की रणनीति साफ है: भाजपा और जदयू बराबरी पर लड़ेंगे, छोटे दलों को भूमिका दी जाएगी, और चिराग की LJP(R) गठबंधन में शामिल होकर महागठबंधन के खिलाफ ताकत दिखाएगी।
विपक्ष की तैयारी और सीटों का बंटवारा अबतक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है, जिससे चुनावी लड़ाई और दिलचस्प होती जा रही है।
प्रमुख चुनौती यह होगी कि उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, क्षेत्रीय संतुलन और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रचार और रणनीति बनाई जाए।
NDA का संदेश
“एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे” — यह NDA की मूल रणनीति है।
गठबंधन का यह संतुलन दिखाता है कि बड़े दल और छोटे दल दोनों मिलकर चुनाव जीतने का संदेश देना चाहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सीट शेयरिंग NDA की एकजुटता और गठबंधन की रणनीति की मजबूती को उजागर करती है, जबकि विपक्ष की हरकतों पर भी यह दबाव बनाए रखेगी।




