Saturday, January 17, 2026

भिलाई इस्पात संयंत्र में कैप्टिव 5G नेटवर्क का सफल परीक्षण; किसी भी पीएसयू में पहली बार

भिलाई। सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र ने एक और उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) के अंतर्गत पहली बार कैप्टिव 5जी नेटवर्क का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण संयंत्र में औद्योगिक संचार, स्वचालन तथा उच्च गति डेटा ट्रांसमिशन की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। यह पहल भिलाई इस्पात संयंत्र के दूरसंचार विभाग द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के सहयोग से की गई।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विभागाध्यक्ष (दूरसंचार) प्रकाश तथा महाप्रबंधक (दूरसंचार) एच. आर. सिरमौर ने निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया, जबकि इस परियोजना की समग्र समीक्षा मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत) टी. के. कृष्ण कुमार द्वारा की गई। इस परियोजना की नींव 12 जुलाई 2024 को आईआईटी दिल्ली एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के दूरसंचार विभाग की टीमों के बीच हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान रखी गई थी, जिसमें संयंत्र में 5जी नेटवर्क तकनीक के कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श हुआ। इस बैठक में आईआईटी दिल्ली से प्रोफेसर के. के. सिरोही एवं ए. एस. मंडल ने भाग लिया, जबकि भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत) टी. के. कृष्ण कुमार तथा दूरसंचार विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

इसके पश्चात अगस्त 2025 के दौरान प्रोफेसर के. के. सिरोही एवं ए. एस. मंडल ने भिलाई इस्पात संयंत्र के एसएमएस-3 विभाग का दौरा कर वहाँ के बुनियादी ढाँचे, कार्य प्रणालियों एवं संचार व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन किया। उनके मूल्यांकन में यह पाया गया कि भारी धातु संरचनाओं एवं उच्च ध्वनि (शोर) स्तर के कारण मोबाइल एवं वॉकी-टॉकी दोनों के सिग्नल कमजोर पड़ रहे थे, जिससे प्रभावी संचार में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही थीं और परिचालन प्रदर्शन प्रभावित हो रहा था।

विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत एसएमएस-3 क्षेत्र में आईआईटी दिल्ली द्वारा विकसित कैप्टिव 5जी नेटवर्क उपकरण के परीक्षण का संयुक्त निर्णय लिया गया। तदनुसार, आईआईटी दिल्ली की तकनीकी टीम ने 14 से 16 अक्टूबर 2025 तक भिलाई इस्पात संयंत्र में कैप्टिव 5जी प्रणाली की स्थापना एवं परीक्षण किया। टीम ने बीओएफ नियंत्रण कक्ष, एलएफ-2, सीके-2 तथा बिलेट यार्ड सहित प्रमुख परिचालन बिंदुओं पर कैप्टिव 5जी नेटवर्क को सफलतापूर्वक स्थापित किया। वरिष्ठ प्रबंधक (दूरसंचार) एस. भट्टाचार्य एवं सहायक प्रबंधक (दूरसंचार) प्रजेश श्रीवास्तव के समन्वय में वॉयस एवं वीडियो कॉल सिग्नल परीक्षण किया गया। साथ ही वरिष्ठ प्रबंधक (दूरसंचार) पंकज राय द्वारा सीसीटीवी कैमरों एवं कंप्यूटरों के बीच वायरलेस कनेक्टिविटी स्थापित करने हेतु 5जी नेटवर्क का प्रयोग किया गया, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे।

आईआईटी दिल्ली की टीम ने भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा प्रदत्त सहयोग एवं तकनीकी समर्थन की सराहना करते हुए आगामी दौरे में उच्च-तीव्रता परीक्षण के एक और व्यापक चरण की अनुशंसा की। आईआईटी दिल्ली के प्रतिनिधियों के अनुसार, यह सफल परीक्षण किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में कैप्टिव 5जी नेटवर्क के प्रथम सफल कार्यान्वयन का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें मौजूदा उपकरणों एवं संचार प्रणालियों को 5जी तकनीक के माध्यम से निर्बाध रूप से संचालित किया गया।

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