आधे सत्र बाद स्कूल ने ठोंसी CG बोर्ड की हिंदी मीडियम किताबें… बच्चों का साल बर्बाद, पालक भड़के…
भिलाई/दुर्ग। हाउसिंग बोर्ड स्थित भिलाई नायर समाजम इंग्लिश मीडियम स्कूल द्वारा बच्चों के भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ का मामला सामने आया है।
स्कूल ने पालकों को CBSE बता कर एडमिशन दिया, NCERT/CBSE की महंगी किताबें खरीदवाईं, और अब आधा सत्र बीतने के बाद अचानक CG बोर्ड की हिंदी मीडियम मुफ्त किताबें थमा दीं।
यह सिर्फ गुमराह करना नहीं—
यह शिक्षा के नाम पर ठगी का सबसे बड़ा मामला है।
पालकों का आरोप साफ— “ये CBSE स्कूल है, ये बात हमसे झूठ बोलकर कही गई!’’
पालकों ने बताया—
“हमें कहा गया था कि स्कूल CBSE का है।
CBSE/NCERT की किताबें खरीदने मजबूर भी किया गया।
अब बोले कि बच्चे CG बोर्ड से पढ़ेंगे।
भाषा भी बदली, किताबें भी बदली…
ये क्या मजाक है हमारे बच्चों के भविष्य के साथ?”
एक अभिभावक ने गुस्से में कहा—
“यह धोखाधड़ी है। बोर्ड बदलने से पूरे साल की मेहनत मिट्टी में।”
दूसरे पालक का बयान—
“स्कूल को जब पता था कि CG बोर्ड 8वीं की परीक्षा लेगा
तो हमें क्यों नहीं बताया?
किस आधार पर CBSE बोलकर एडमिशन लिया गया?”
सबसे बड़ा खुलासा : स्कूल में न CBSE का बोर्ड लिखा, न CG का! एफिलिएशन नंबर छुपाया गया
पूरी जांच में ये सामने आया कि—
- स्कूल के बाहर कोई बोर्ड नहीं
- वेबसाइट/प्रोस्पेक्टस में कोई एफिलिएशन नंबर नहीं
- न CBSE, न CG बोर्ड— दोनों का जिक्र गायब
यह साफ संकेत है कि स्कूल प्रबंधन ने जानबूझकर सूचना छुपाई ताकि पालक भ्रमित रहें और एडमिशन लेते रहें।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष (संभावित दावा): “हमने बोर्ड नहीं बदला, सिर्फ निर्देशों का पालन किया”
जब पालकों ने बात की, प्रबंधन ने सफाई देने की कोशिश की—
“8वीं बोर्ड की परीक्षाएं इस वर्ष से शुरू हैं, इसलिए किताबें दी गईं।
हमने किसी को गुमराह नहीं किया।”
लेकिन पालकों का सवाल सीधा है—
“अगर गुमराह नहीं किया तो CBSE का बोर्ड क्यों नहीं लिखा?
NCERT की महंगी किताबें क्यों खरीदवाईं?
आधे सत्र बाद भाषा क्यों बदली?”
शिक्षा विभाग पर उठ रहे सवाल – क्या यह सब चुप्पी में हुआ?
अब बड़ा प्रश्न यह है—
- दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी कहाँ थे?
- किस आधार पर स्कूल बिना एफिलिएशन नंबर के चल रहा है?
- क्या स्कूल को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
कानून की दृष्टि से—
- बिना एफिलिएशन के CBSE बताकर एडमिशन लेना धोखाधड़ी
- गलत जानकारी देकर पैसा वसूलना कानूनी अपराध
- पुस्तकों के नाम पर आर्थिक नुकसान कराना साक्ष्य आधारित ठगी
पालकों ने उठाई तीन बड़ी माँगें—
- स्कूल प्रबंधन पर FIR दर्ज हो
- बोर्ड/एग्जाम को लेकर बच्चों को राहत दी जाए
- एफिलिएशन की पूरी जांच हो—नकली हो तो स्कूल पर कार्रवाई हो
कई पालक आंदोलन की तैयारी में भी हैं।
सोशल मीडिया में आग— “फर्जी CBSE, फर्जी पहचान… बच्चों का भविष्य कौन लौटाएगा?”
फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम पर पैरेंट्स के ग्रुप में मामला वायरल है।
लोग सवाल पूछ रहे हैं—
- “क्या शिक्षा अब व्यापार बन चुका है?”
- “बिना बोर्ड के स्कूल चलाने की किसने अनुमति दी?”
- “ये बच्चा–पालक–अधिकारों का खुला उल्लंघन है।”
यह सिर्फ एक स्कूल नहीं—यह पूरे सिस्टम की पोल है
यह घटना दिखाती है कि—
- स्कूलों को कोई डर नहीं
- निरीक्षण प्रक्रिया नदारद
- बच्चों का भविष्य व्यवस्था के हाथों बंधक
- पालकों की जेब, भावनाएँ—सब पर धोखा
अगर ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई,
तो कल हर गली में ‘बोर्ड-रहित’ स्कूल उग आएंगे।
और बच्चों की जिंदगी प्रयोगशाला बन जाएगी।
समापन— “शिक्षा का मंदिर अब मुनाफे की मंडी न बने!”
यह मामला केवल एक खबर नहीं—
यह चेतावनी है कि भिलाई के शिक्षा सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी है।
और इसे अनदेखा करने की कीमत आने वाले समय में पूरा शहर चुकाएगा।




