भिलाई। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मज़दूर कार्यकर्ता समिति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अवगत कराया है कि औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत मज़दूर वर्तमान परिस्थितियों में गहरी दहशत और असुरक्षा की स्थिति से गुजर रहे हैं। एस.आई. आर.की कार्यवाही शुरू होने के बाद से मज़दूरों में भय का माहौल बना हुआ है, वहीं केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम संहिताओं ने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
कई मज़दूरों के पास आवश्यक दस्तावेज़ों का अभाव है—विशेषकर वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनके माता–पिता के नाम शामिल न होने और शिक्षा का स्तर बहुत कम होने के कारण वे दस्तावेज़ी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे। अधिकांश मजदूरों के पास केवल आधार कार्ड है, जिसके चलते वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं। इस बीच बी.एल.ओ. द्वारा किसी प्रकार की स्पष्ट सलाह या मार्गदर्शन न मिलना उनकी परेशानियों को और बढ़ा रहा है।

इसी प्रकार, नए श्रम संहिताओं के तहत 300 से कम मज़दूरों वाले कारखानों में मालिक और ठेकेदार किसी भी मज़दूर को मनमाने ढंग से कार्य से बाहर कर सकते हैं, और ऐसे मामलों में मज़दूरों के पास शिकायत करने के लिए कोई ठोस मंच भी उपलब्ध नहीं है। इन परिस्थितियों के कारण मज़दूर गहरी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक चिंता का सामना कर रहे हैं।
उपरोक्त गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मज़दूर कार्यकर्ता समिति द्वारा 28 नवम्बर 2025 को दुर्ग श्रमायुक्त कार्यालय में श्रम सचिव, श्रम मंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाए।




