27 नवंबर से 17 दिसंबर तक रेल परिचालन प्रभावित होने की खबर पर घेरा केंद्र सरकार को, बोले—जनता की परेशानी का जवाब दे रेल मंत्रालय
दुर्ग। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाई जा रही आवाज के बीच छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 50 से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने की खबर ने रेल यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी की रैली और कांग्रेस के जनआंदोलन से केंद्र सरकार इतनी असहज है कि अब आम जनता की यात्रा भी प्रभावित हो रही है? उन्होंने मांग की कि रेल परिचालन प्रभावित होने के वास्तविक कारणों और यात्रियों को होने वाली परेशानी पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे।
दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के झारसुगुड़ा पैसेंजर यार्ड में अधोसंरचना विकास एवं नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के चलते 27 नवंबर से 17 दिसंबर 2026 तक अलग-अलग तारीखों में ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। अरुण वोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और अन्य राज्यों के बीच यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को इससे परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार आम जनता के अधिकारों, लोकतंत्र और जवाबदेही के मुद्दे उठा रहे हैं। ऐसे समय में केंद्र सरकार को जनता की समस्याओं से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि यात्रियों की परेशानियों को नजरअंदाज करना चाहिए।
अरुण वोरा ने कहा कि प्रभावित होने वाली प्रमुख ट्रेनों में टाटानगर–बिलासपुर एक्सप्रेस (18113), बिलासपुर–टाटानगर एक्सप्रेस (18114), हटिया–दुर्ग एक्सप्रेस (18641), दुर्ग–हटिया एक्सप्रेस (18642), पुणे–हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस (12221) और हावड़ा–पुणे दुरंतो एक्सप्रेस (12222) शामिल हैं। इसके अलावा सांतरागाछी–पुणे एक्सप्रेस (20822), पुणे–सांतरागाछी एक्सप्रेस (20821), जबलपुर–सांतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस (20827) और सांतरागाछी–जबलपुर हमसफर एक्सप्रेस (20828) जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें भी निर्धारित तारीखों पर प्रभावित होने की जानकारी है। कुछ ट्रेनों को रद्द करने, कुछ का मार्ग बदलने और कुछ का परिचालन गंतव्य से पहले समाप्त करने की भी सूचना है।
उन्होंने कहा कि रेलवे आम जनता के आवागमन का प्रमुख साधन है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, छोटे व्यापारी, मरीज और उनके परिजन रेल सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ट्रेनों के रद्द होने या मार्ग बदलने से उनकी यात्रा योजनाएं बिगड़ सकती हैं और वैकल्पिक साधनों पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। जिन यात्रियों ने महीनों पहले टिकट आरक्षित कराए हैं, उनके लिए अंतिम समय में दूसरी व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है।
अरुण वोरा ने कहा कि रेलवे के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी कार्य आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करना भी रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित मार्गों पर वैकल्पिक यात्री सेवाओं की संभावनाओं पर विचार किया जाए, ट्रेनों की स्थिति की जानकारी समय रहते दी जाए और टिकट, रिफंड तथा यात्रा में बदलाव से संबंधित स्पष्ट जानकारी यात्रियों को उपलब्ध कराई जाए।
अरुण वोरा ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से मांग की कि छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली रेल सेवाओं की समीक्षा कर यात्रियों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान जनता के अधिकारों और जवाबदेही के सवालों को सामने लाने का प्रयास है। सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और रेल यात्रियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। विकास कार्यों के नाम पर यात्रियों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
