Friday, January 16, 2026

भिलाई के आकाश झमनानी ने सौर ऊर्जा से पाई बिजली बिल से आजादी

दुर्ग। बदलती जीवन शैली और विद्युत चलित उपकरणों के प्रयोग में लगातार वृ़िद्ध से बिजली बिल में बढ़ोतरी के बीच, हुडको निवासी आकाश झमनानी ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जो शहर के अन्य नागरिकों के लिए प्रेरणा बन गई है। आकाश जी ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाया है, जिसके बाद पिछले 6 महीनों से उनका बिजली बिल शून्य (₹0) आ रहा है।

झमनानी बताते हैं कि बिजली की बढ़ती जरुरत के कारण घर का बिजली बिल लगातार बढ़ रहा था, जिससे वे काफी चिंतित थे। उन्होंने देखा कि उनके पड़ोसी ने सोलर पैनल लगवाए हैं और उन्हें उसका काफी लाभ मिल रहा है। पड़ोसी से मिली सकारात्मक जानकारी के बाद उन्होंने भी अपने घर पर सोलर प्लांट इंस्टॉल करवाया।

झमनानी के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट में उन्हें सरकार की ओर से ₹1,08,000 की भारी सब्सिडी प्राप्त हुई, जिससे उनके लिए यह निवेश बेहद आसान हो गया। वे बताते हैं कि इंस्टॉलेशन टीम ने बेहतरीन सर्विस दी और कनेक्शन करने से लेकर चालू करने तक की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही सुचारू रूप से पूरा किया। श्री झमनानी ने बताया कि पिछले 6 महीनों से मैंने बिजली बिल के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया है। यह न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सबसे सुरक्षित और साफ-सुथरा विकल्प है।

घर पर सोलर पैनल लगवाने के बाद होने वाली बचत के की वजह से श्री झमनानी अब अपनी दुकान के लिए भी कमर्शियल सोलर प्लांट लगवाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि कमर्शियल सेक्टर में नियम थोड़े अलग हैं, लेकिन बिजली बिल में होने वाली भारी बचत को देखते हुए वे इसे अपनी दुकान के लिए जरुरी और अच्छा निवेश मानते हैं। झमनानी ने भिलाईवासियों और आम जनता से अपील की हैं कि जितनी जल्दी हो सके, सौर ऊर्जा को अपनाएं। यह तकनीक पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी भी तरह की तकनीकी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। बस पैनल को साफ रखें, और वह आपको भरपूर बिजली देता रहेगा।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, दुर्ग क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री संजय खंडेलवाल ने कहा कि सरकार इस योजना में बहुत बड़ा आर्थिक अंशदान सब्सीडी के रुप में दे रही है, इसलिए हर घर को इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। यह न केवल हमारी आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा है, बल्कि हमारे देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने एवं पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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