Saturday, January 17, 2026

मानवाधिकार दिवस के विशेष अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने किया कार्यशाला एवं अन्य जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन

दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा जारी स्टेट प्लाॅन ऑफ एक्शन में दिए गए निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के विशेष अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा जिले के विभिन्न स्थानों पर अनेक जनजागरूकता शिविरों और कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।

प्रथम कार्यक्रम जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग में “Speedy Trial is a Basic Human Right” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें त्वरित न्याय के महत्व, मानवाधिकारों की रक्षा में न्यायालय, पुलिस एवं अधिवक्ताओं की सामूहिक भूमिका तथा प्रक्रियागत सुधारों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
अभियोजन अधिकारी शिक्षा मेश्राम ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि त्वरित और निष्पक्ष न्याय प्रत्येक नागरिक का मूल मानवाधिकार है, और इसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अभियोजन तंत्र का कर्तव्य है कि मजबूत प्रमाण, प्रभावी सुनवाई और पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा न्याय की गति को बढ़ाया जाए। पुलिस, न्यायालय और अधिवक्ताओं के समन्वित प्रयास से लंबित मामलों में कमी लाई जा सकती है तथा प्रत्येक पीड़ित और अभियुक्त को उनके संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

मुख्य वक्ता नवम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पंकज दीक्षित ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि न्याय का अधिकार तभी सार्थक है, जब वह समयबद्ध हो। “Speedy Trial” केवल कानूनी सिद्धांत नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का एक मूल मानवाधिकार है, जो समानता, गरिमा और न्याय के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है। न्याय में अनावश्यक विलंब न पीड़ित के हित में है, न अभियुक्त के। इसलिए न्यायालय, अभियोजन, अधिवक्ता और पुलिस सभी को समन्वय, दक्षता और संवेदनशीलता के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए। लक्ष्य यही होना चाहिए कि प्रत्येक प्रकरण में निर्णय समयानुकूल, तथ्यपरक और संविधान के मानवीय मूल्यों के अनुरूप हो।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि मानवाधिकार केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि एक मानवीय दायित्व हैं, जो हमें संवेदनशील, विवेकपूर्ण और न्यायपूर्ण व्यवहार के लिए प्रेरित करते हैं। पुलिस विभाग का मुख्य कर्तव्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, तथा किसी भी प्रकार के अत्याचार, भेदभाव, हिंसा या मानवाधिकार उल्लंघन के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति का कड़ाई से पालन किया जाता है।
अधिवक्ता संघ दुर्ग की अध्यक्ष नीता जैन ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि मानवाधिकार हमारे लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक नैतिकता की आधारशिला हैं। अधिवक्ता समुदाय का दायित्व केवल न्यायालय में पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करना ही नहीं, बल्कि समाज में संवैधानिक मूल्यों का प्रसार करना भी है। अधिवक्ता न्याय-व्यवस्था और नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हमारी जागरूकता, निष्पक्षता और प्रतिबद्धता ही न्याय प्रणाली को जीवंत और प्रभावी बनाती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के० विनोद कुजूर ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि न्यायालय का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो, तथा प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकार सुरक्षित रहें। कानून का शासन तभी सार्थक है जब न्याय सभी को बिना भेदभाव और भय के उपलब्ध हो। न्यायपालिका की प्रतिबद्धता है कि वंचित, निरुद्ध, कमजोर और सहारा-विहीन व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता से की जाए। मानवाधिकारों का संरक्षण ही न्याय-व्यवस्था की वास्तविक सफलता है, और इसके लिए न्यायाधीश, अधिवक्ता, पुलिस, प्रशासन तथा नागरिक सभी को मिलकर इसे सामाजिक आचरण का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।

उक्त कार्यक्रम में केन्द्रीय जेल दुर्ग में निरूद्घ बंदियों तथा पैरालीगल वालेंटियर्स द्वारा निर्मित पेंटिंग्स की भी प्रदर्शन लगायी गयी थी तथा मानवाधिकार दिवस से संंबंधित विशेष रंगाेली भी बनायी गयी थी। उक्त कार्यशाला में न्यायाधीशगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, अभियोजन अधिकारीगण, जिला अधिवक्ता संघ के अधिवक्तागण तथा पुलिस विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

द्वितीय कार्यक्रम शासकीय डाॅ० वामन वासुदेव पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में आयोजित किया गया, जिसमें तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी, अष्टम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम सिंह मरकाम तथा वरिष्ठ अधिवक्ता ओम प्रकाश जोशी ने उपस्थित होकर छात्राओं को विधिक जानकारी प्रदान की। उक्त कार्यक्रम विशेष रूप से बेटियों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण पर केन्द्रित था। वक्ताओं ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि आज की बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को मानवाधिकारों के महत्व के साथ-साथ नवीन कानूनों की जानकारी भी सरल एवं प्रभावी भाषा में दी गई। उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझाया गया। छात्राओं को संविधान की प्रस्तावना का शपथ-पाठ कराया गया, जिससे उनमें राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ सके। इसके अतिरिक्त, बालिकाओं द्वारा निर्मित मानवाधिकार विषयक आकर्षक पेंटिंग प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया, जिसमें छात्राओं ने अपने विचारों और रचनात्मकता को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया।

तृतीय कार्यक्रम भिलाई-3 के विद्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी अभिनव डहरिया ने उपस्थित बच्चों को मौलिक अधिकार एवं उनका महत्व, मौलिक कर्तव्य एवं नागरिक दायित्व, महिलाओं के लिए विशेष विधिक संरक्षण, POCSO अधिनियम एवं आत्म-सुरक्षा, नारी शक्ति एवं समाज में महिलाओं की प्रगति, नशा-उन्मूलन और उसके दुष्परिणाम, विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका, निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्धता एवं पैरालीगल वॉलंटियर की भूमिका के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की। यह शिविर न केवल जानकारी का माध्यम बना, बल्कि समाज के भविष्य इन छात्रों को संविधान के मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी सिद्ध हुआ।

चतुर्थ कार्यक्रम शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय काेलिहापुरी दुर्ग में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के न्याय रक्षक अधिवक्तागण सुदर्शन महलवार, भाग्यश्री नातु एवं आदेश रामटेके उपस्थित हुए। उन्होंने अपने व्यक्तव्य में कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा पाने, किसी भी प्रकार के भेदभाव, हिंसा, प्रताड़ना या बुलिंग से मुक्त रहने, तथा अपनी बात निडर होकर रखने का अधिकार है। न्याय रक्षक अधिवक्तागण का यह कर्तव्य है कि हम समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर बच्चों और युवाओं, तक मानवाधिकार और कानून की सही जानकारी पहुँचाएं। आप सभी हमारे देश का भविष्य हैं, और यदि आप अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझते हैं, तो आप एक मजबूत, सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इस प्रकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा मानवाधिकार दिवस पर आयोजित उपरोक्त कार्यक्रम नागरिकों में न्यायिक प्रक्रिया, अधिकारों और उपलब्ध निःशुल्क विधिक सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्घ हुआ।

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