(वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन के फेसबुक वाल से) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर के भारत दौरे के बाद अपने घर लौट चुके हैं। पता नहीं यहां आने पर उनके जहन में भिलाई आया या नहीं…या फिर उनके साथ हमारे भारतीय नेताओं ने अपने भाषणों या आपसी चर्चा के दौरान भिलाई का जिक्र किया या नहीं…
मोमिन खां मोमिन (1800-1852) इसलिए तो लिख चुके हैं-वो जो हममे तुममे करार था, तुम्हे याद हो कि न याद हो…कभी हम भी तुम थे आशना, तुम्हें याद हो कि न याद हो…(आशना के मायने दोस्त या करीबी)
खैर, सच्चाई ये है कि आज रूस और भिलाई दोनों ही बदले हुए दौर में है। वो सोवियत संघ (यूएसएसआर) का दौर था, जब यहां सेवा देने वाले इंजीनियर वहां जाकर मंत्रिपरिषद तक में जगह पाते थे और वहां से आने वाले हर बड़े नेता का भिलाई पहुंचना लाजिम था। दरअसल, तब देश की आत्मनिर्भरता की मिसाल दिखाने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ज्यादातर विदेशी मेहमानों को अक्सर भिलाई भेजा करते थे और फिर अगर बात रूस की हो तो वहां से आने वाले हर बड़े नेता के दौरे में भिलाई शामिल ही रहता था।
उस दौर में दुनिया के सबसे बड़े नेताओं में से एक और तत्कालीन सोवियत संघ के प्रधानमंत्री निकिता सर्गेयेविच ख्रुश्चेव यहां दो दिन के दौरे में 14 फरवरी 1960 को आए थे। तब उन्होंने सिविक सेंटर में आम सभा को भी संबोधित किया था। यहां फोटो में देख सकते हैं तब खाली मैदान में सिविक सेंटर आबाद हो रहा था। आज जहां न्यू सिविक सेंटर है, वहां ख्रुश्चेव की आमसभा हुई थी। तब चित्रमंदिर भी नहीं बना था।
फिर उनके बाद उस दौर में वैश्विक कूटनीति के माहिर माने जाने वाले अलेक्सेई कोसिजिन सोवियत संघ मंत्रिपरिषद के उपाध्यक्ष (हमारे यहां उपप्रधानमंत्री) की हैसियत से यहां दो दिन के लिए आए थे।
तब 26 फरवरी 1961 को कोसिजिन ने मरोदा गांव की खाली जमीन पर दोनों मुल्क की दोस्ती के नाम पौधा लगाकर एक नई शुरूआत की थी। इस पौधे के इर्द-गिर्द ही मैत्रीबाग विकसित किया गया। इस तरह ढेर सारे सोवियत नेता, राजदूत, खिलाड़ी और कलाकारों की फेहरिस्त है, जो भारत में होने पर भिलाई आए बिना नहीं रहते थे। इनमें आप राज कपूर की ‘मेरा नाम जोकर’ में यादगार भूमिका निभाने वाले रूसी कलाकार क्सेनिया रियाबिंकिना को भी जोड़ सकते हैं।
मेरी जानकारी में सोवियत संघ टूटने के पहले भिलाई ने वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री की आखिरी बड़ी मेजबानी की थी। वो सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता मिखाइल गोर्बाच्योव का दौर था, तब वहां की मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) के तौर पर निकोलाई इवानोविच रिझकोव 23 नवंबर 1986 को भिलाई आए थे। तब उन्होंने कोई सार्वजनिक सभा तो नहीं ली थी लेकिन भिलाई स्टील प्लांट का दौरा किया था। उनके बाद फिर किसी बड़े रूसी नेता ने भिलाई का रुख नहीं किया। फिर तो सोवियत संघ भी टूट गया और हमारे यहां भी आर्थिक नीतियों में आमूल-चूल बदलाव होने के बाद रूस पर हमारी निर्भरता कम होती गई।
फिलहाल कुछ पुराने वीडियो मेरी नजर से गुजर रहे थे, जिसमें प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू के बाद इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लेकर नरसिम्हाराव तक के रूस दौरे में दिए गए भाषणों में भिलाई का प्रमुखता के साथ जिक्र है। भिलाई आने वाले रूसी हस्तियों के बारे में आप तफसील से जानना चाहें तो मेरी किताब ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ पढ़ सकते हैं। भिलाई आने वाले रूसी हस्तियों से जुड़ी आपकी यादें हो तो साझा कर सकते हैं…यहां पहली फोटो ख्रुश्चेव की सिविक सेंटर की आमसभा की और दूसरी रिझकोव के भिलाई स्टील प्लांट दौरे की….




