दुर्ग। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में आज प्रवेश प्रथम एवं द्वितीय सोपान प्रशिक्षण एवं परीक्षण शिविर का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ झंडा गीत के माध्यम से हुआ। आज के प्रशिक्षण सत्र में मुख्य प्रशिक्षक सतविंदर कौर, रचना पाल और सतीश धीवर द्वारा विद्यार्थियों को विविध गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में आशुतोष सिंह, गीता माली, टकेश्वर साहू, राजेश कुमार, नीना खत्री, एसवीएस गायत्री सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएँ सहभागी बने। कार्यक्रम के मुख्य प्रभारी डॉ अजय आर्य ने स्कार्फ पहनाकर प्राचार्य उमा शंकर मिश्र का स्वागत किया और सतविंदर कौर ने उपप्राचार्या पुष्पा बड़ा का स्वागत किया। प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘स्काउट-गाइड केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया है। सेवा, सहयोग और अनुशासन जैसे गुण विद्यार्थियों को जीवन में ऊँचा उठाते हैं और ऐसे शिविर नेतृत्व, जिम्मेदारी और टीम-भावना को विकसित करते हैं।

जंबूरी में भाग लेने वाले प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी में भाग लेने वाले डॉ. अजय आर्य को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र सौंपा। जंबूरी में भाग लेने वाले विद्यार्थी आदर्श कुमार को भी प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
डॉ अजय आर्य ने अपने संबोधन में सोपान के महत्व पर कहा कि ‘प्रथम, द्वितीय और तृतीय सोपान जीवन की तीन सीढ़ियाँ हैं। सोपान का अर्थ ही सीढ़ी है और ये प्रशिक्षण शिविर हमें लगातार ऊपर उठने की प्रेरणा देते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लेना चाहिए और स्काउटिंग में स्कार्फ की गाँठ तब तक नहीं बाँधी जाती जब तक कोई अच्छा कार्य न किया जाए। इसका उद्देश्य प्रतिदिन एक अच्छा कार्य कर व्यक्तित्व को ऊँचा उठाना है।’ उन्होंने दो महत्वपूर्ण विचार साझा किए – ‘जो स्वयं को बदल लेता है, वही दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है।’ तथा ‘अनुशासन और सेवा-भाव वो दो पंख हैं जिनसे जीवन ऊँचाई पर उड़ता है।’ उपप्राचार्या पुष्पा बड़ा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘स्काउटिंग हमें जिम्मेदारी का सही अर्थ सिखाती है और जब विद्यार्थी अपनी जिम्मेदारी समझ लेते हैं, तब उनका व्यक्तित्व स्वतः निखर उठता है।

कल शिविर के समापन दिवस पर कम्युनिटी लंच और सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा। डॉ अजय आर्य ने कहा कि ‘हमें मिलकर, साथ बैठकर भोजन करने की संस्कृति सीखनी चाहिए। यह छोटी गतिविधि दिखती है, पर इससे व्यक्तित्व में बहुत बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आता है।’ सर्वधर्म प्रार्थना के संबंध में उन्होंने कहा कि ‘यह हमें सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाती है और यही स्काउटिंग का मूल संदेश भी है – एकता, शांति और सौहार्द।’
स्काउट-गाइड विभाग की डॉ राखी श्रीवास्तव ने बताया कि कुल 134 विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और कल समापन सत्र में परीक्षण, मूल्यांकन की प्रक्रिया संपन्न होगी।




