भिलाई। 30 नवम्बर 2025 की वह अविस्मरणीय सर्द शाम, जब कड़क सैन्य वर्दी में युवा कैडेट मोहोनीश मल्लिक मोन्नप्पा पुणे स्थित खडकवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के फॉक्स्ट्रॉट स्क्वॉड्रन की सीढ़ियाँ उतर रहे थे। कंधे पर टंगी इंसास राइफल, कदमों में दृढ़ता और सामने लगी वीर शहीद अरुण खेत्रपाल की प्रतिमा के समक्ष गहरी श्रद्धा के साथ उपस्थित मोहोनीश, यह दृश्य केवल एक कैडेट के ‘पासिंग आउट परेड’ (पीओपी) के जीवन का महत्वपूर्ण क्षण नहीं था; यह भिलाई की उन परंपराओं का भी उत्सव था, जिन्होंने वर्षों से अनुशासन, समर्पण और सेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाया है।
149वें ऑटम कोर्स की इस भव्य पासिंग आउट परेड में, 328 कैडेट्स के साथ, जिनमें केन्या, तंजानिया, श्रीलंका, भूटान, फिजी और फिलीपींस जैसे मित्र देशों के 20 युवा भी शामिल थे, भिलाई के कैडेट मोहोनीश की यह यात्रा एक व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक थी। यह भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और समूचे छत्तीसगढ़ के लिए एक गहरा भावनात्मक क्षण था। कारण भी स्पष्ट है—मोहोनीश की जड़ें इसी स्टील सिटी में हैं। उनकी माता देचम्मा मल्लिक एक गृहिणी हैं और सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के नगर सेवाएँ विभाग के उप-महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत उनके पिता श्री. सुरजीत मल्लिक, उन सैंकडों समर्पित संयंत्रकर्मियों में से हैं जिनके जीवन-मूल्यों ने वर्षों से इस शहर की पीढ़ियों को गढ़ा है।

डीपीएस भिलाई के मैदानों से लेकर एनडीए के ड्रिल स्क्वायर तक, जहाँ वे एयर फोर्स फ्लाइंग स्ट्रीम में शीर्ष दस कैडेट्स में शामिल रहे, कैडेट मोहोनीश की उड़ान उस सामूहिक स्वप्न का प्रतीक है जिसे भिलाई के हजारों परिवार संजोकर रखते हैं। औद्योगिक नगरी से परे भिलाई एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक संगम है और यह उपलब्धि इसी मिट्टी की विराट क्षमता का प्रमाण है।
खेल और कला दोनों में दक्ष, कैडेट मोहोनीश एनडीए के फॉक्स्ट्रॉट स्क्वॉड्रन के फुटबॉल-इन-चार्ज भी रहे और इंटर-स्क्वॉड्रन प्रतियोगिता में टीम को चौथा स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगीत में रुचि रखते हुए वे एनडीए के प्रतिष्ठित म्यूज़िक कॉयर का भी हिस्सा रहे। यह व्यापक प्रतिभा भिलाई और बीएसपी के उस वातावरण को रेखांकित करती है जो बच्चों को विविध अवसर और समृद्ध एक्स्पोज़र प्रदान करता है।
खडकवासला में संपन्न भव्य पासिंग आउट परेड समारोह में एडमिरल दिनेश त्रिपाठी, सीएनएस जो स्वयं भी एनडीए के गौरवशाली पूर्व छात्र रहे हैं, ने परेड का निरीक्षण किया। सूडान ब्लॉक पर प्रकाश-संगीत शो, बॉम्बे स्टेडियम में इक्विटेशन व जिमनास्टिक प्रदर्शन, सलारिया स्क्वॉयर पर सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम की अनूठी प्रस्तुति, और मात्र 300 फीट की ऊँचाई पर तीन सुखोई-30 एमकेआई विमानों की रोमांचक फ्लाई-पास्ट—इन सभी ने उस क्षण की अद्वितीय गरिमा को और बढ़ा दिया। यह ‘स्कॉलर वॉरियर्स’ के निर्माण की समृद्ध सैन्य परंपरा का पुनर्स्मरण था।
परंतु भिलाई और बीएसपी के लिए यह क्षण समारोह से कहीं अधिक मायने रखता है। यह हमें याद दिलाता है कि यह शहर देश को मज़बूत इस्पात देने के साथ-साथ राष्ट्रनिर्माण की नई पीढ़ी भी गढ़ता है। यहाँ मूल्य गढ़े जाते हैं, मनोबल सँवारा जाता है, और अनुशासन जीवन का संस्कार बनता है।
कैडेट मोहोनीश स्वयं मुस्कान के साथ स्वीकारते हैं कि एनडीए का सफर चुनौतियों और संघर्षों से भरा था—परन्तु पासिंग आउट परेड के उस क्षण में हर कठिनाई सार्थक लगने लगी। अब वे हैदराबाद स्थित एयर फोर्स एकेडमी की ओर अग्रसर हैं, जहाँ वे भारतीय वायुसेना के भावी फाइटर पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और ‘फ्लाइंग ऑफिसर’ के रूप में देश की सेवा हेतु तैयार खड़े होंगे।
भिलाई के युवाओं को प्रेरणा देते हुए वे कहते हैं—“अगर वर्दी पहनने का सपना है, तो बस पूरी ताकत से लग जाओ। अपनी मातृभूमि की सेवा करने का अहसास किसी चीज़ से तुलना नहीं कर सकता।”
कैडेट मोहोनीश मल्लिक मोन्नप्पा की यह उपलब्धि उनके साहस, उनकी मेहनत और उनके परिवार के मूल्य-संस्कार की जीत है—और उतनी ही BSP की उस परंपरा की पुनर्पुष्टि भी, जो हर पीढ़ी को राष्ट्रसेवा की ओर अग्रसर करती आई है।
भिलाई आज अपने एक बेटे पर गर्व कर रहा है। भिलाई स्टील प्लांट आज अपने मूल्यों को फिर से जीवंत होते देख रहा है। और राष्ट्र—भारत—अपने एक और युवा ‘स्काई वॉरियर’ का स्वागत करने को तैयार है, जो देश के आकाश की रक्षा के लिए उड़ान भरने जा रहा है।
भिलाई के इस बेटे की उड़ान, पूरे देश के सम्मान की उड़ान है।




