Saturday, January 17, 2026

भिलाई की पहचान मैत्री बाग पर मंडराया निजीकरण का खतरा—विधायक देवेंद्र यादव ने खोला मोर्चा

SAIL ने जारी की EOI—विधायक देवेंद्र यादव..

भिलाई—भिलाई स्टील प्लांट (SAIL-BSP) द्वारा मैत्री बाग प्राणी उद्यान के दीर्घकालिक प्रबंधन और संचालन के लिए EOI (Expression of Interest) जारी किए जाने के बाद पूरे भिलाई में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
21 नवंबर 2025 को जारी विज्ञापन नंबर BSP-13/25-26 के माध्यम से SAIL ने स्पष्ट किया है कि वह मैत्री बाग को लंबे समय के लिए ऐसे निजी संगठनों को सौंपना चाहता है, जिनके पास बड़े स्तर के प्रबंधन, संचालन और वित्तीय क्षमता की योग्यता हो।


निजीकरण की ओर स्पष्ट संकेत – SAIL का EOI क्या कहता है?

SAIL द्वारा जारी EOI के महत्वपूर्ण बिंदु:

  • मैत्री बाग के संचालन और रखरखाव की पूरी लागत बोलीदाता को वहन करनी होगी।
  • BSP किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं देगा।
    अर्थात चिड़ियाघर के राजस्व, खर्च और लाभ की पूरी जिम्मेदारी निजी संस्था पर होगी।
  • बोलीदाता के पास न्यूनतम 3 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर होना अनिवार्य।
  • बोलीदाता को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की स्वीकृति अनिवार्य।
  • 140 एकड़ में फैले चिड़ियाघर को ‘Self-Sustaining Model’ पर चलाना होगा।

इच्छुक पक्ष SAIL की वेबसाइट से EOI डाउनलोड कर सुझाव व प्रतिक्रियाएँ भेज सकते हैं।

इन शर्तों से साफ है कि मैत्री बाग को कॉर्पोरेट मॉडल पर निजी प्रबंधन के हवाले करने की तैयारी हो चुकी है।


“भिलाई बिकाऊ नहीं है”—विधायक देवेंद्र यादव का तीखा हमला

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने मैत्री बाग के निजीकरण की इस प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—

“ACC सीमेंट, फैरोस्क्रैप के बाद अब सेक्टर-9 हॉस्पिटल और अंचल का एकमात्र चिड़ियाघर मैत्री गार्डन भी बेचने की तैयारी है। यह भिलाई की आत्मा पर हमला है।”

उन्होंने कहा कि—

“सेठ के पैसों से बनी सरकार अब सेठ का कर्ज उतारने में लगी है। छत्तीसगढ़ महतारी की शान भिलाई को तिल–तिल कर बेचा जा रहा है।”

विधायक देवेंद्र ने SAIL के विज्ञापन को
“भाजपा सरकार और कॉरपोरेट के बीच की सांठगांठ का विस्तार”
बताते हुए पुरजोर विरोध दर्ज कराया।


विधायक ने उठाए गंभीर सवाल – “भिलाई की जनता को क्या मिलेगा?”

देवेंद्र यादव ने सवाल उठाया—

  • क्या चिड़ियाघर निजी हाथों में जाने के बाद आम लोगों के लिए सुलभ रहेगा?
  • क्या टिकट दरें बढ़ेंगी?
  • क्या पशु संरक्षण पर व्यावसायिक लालच हावी होगा?
  • क्या यह भिलाई की विरासत खत्म करने का षड्यंत्र है?

उन्होंने कहा कि मैत्री बाग सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भिलाई की पहचान, संस्कृति और पीढ़ियों की यादों की विरासत है।


कांग्रेस का ऐलान – “निजीकरण रोको आंदोलन”

देवेंद्र यादव ने घोषणा की कि कांग्रेस इस निजीकरण की नीति का पुरजोर विरोध करेगी और
भिलाई में बड़े आंदोलन की तैयारी
चल रही है।

उन्होंने साफ कहा—

“हम भिलाई की धरती, अस्पताल और चिड़ियाघर किसी भी कीमत पर बिकने नहीं देंगे।”


निजीकरण की यह प्रक्रिया भिलाई में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रही है!

EOI जारी होने के साथ ही इस बात की पुष्टि हो गई है कि SAIL और केंद्र सरकार मैत्री बाग को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में बढ़ चुकी है।
वहीं विपक्ष इसे
भिलाई की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और जनता के अधिकार पर सीधा हमला
बताकर सड़क पर उतरने को तैयार है।

भिलाई में आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकता है।


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