भिलाई। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU), भिलाई में IQAC के अंतर्गत कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 17 से 19 नवंबर 2025 तक आयोजित तीन दिवसीय Faculty Development Program (FDP) on “Examination Reforms” का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया।
इस कार्यक्रम का सफल आयोजन कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण अरोरा के मार्गदर्शन में तथा रजिस्ट्रार डॉ. अंकित अरोरा एवं निदेशक (UTD) डॉ. पंकज मिश्रा के सहयोग से, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जे. पी. पात्रा और सह-समन्वयक डॉ. पवन पटनायक के नेतृत्व में किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य: “परीक्षा प्रणाली में सुधार लाना, Outcome-Based Education के अनुसार CO-PO Mapping व Assessment Tools को समझाना, Bloom’s Taxonomy आधारित प्रश्न-पत्र निर्माण का प्रशिक्षण देना, तथा शिक्षकों को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम मूल्यांकन पद्धतियों के उपयोग में सक्षम बनाना” था।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण अरोरा ने आयोजन के सार एवं उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में परीक्षा सुधारों को अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा भावी शिक्षा-प्रक्रिया में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा।
परीक्षा सुधारों पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के दूसरे और तीसरे दिन भी प्रसिद्ध शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा प्रभावशाली शैक्षणिक सत्र प्रस्तुत किए गए।
FDP के दूसरे दिन (18 नवंबर) को शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. हिमा एम. एस. (प्रोफेसर, आरवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, बेंगलुरु) ने आउटकम बेस्ड एजुकेशन (OBE) और CO–PO मैपिंग पर विस्तृत सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने OBE की मूल अवधारणा, मापनीय कोर्स आउटकम तैयार करने की प्रक्रिया, तथा उन्हें कार्यक्रम के परिणामों (PO) से प्रभावी रूप से जोड़ने की विधियों की व्याख्या की, जिससे संपूर्ण शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित होता है।
FDP के तिसरे दिन (19 नवंबर) को शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. आर. महेश प्रभु, (निदेशक, क्वालिटी एश्योरेंस, अरोरा यूनिवर्सिटी, हैदराबाद) ने CO आधारित प्रश्नपत्र निर्माण पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रश्नपत्रों की संरचना अधिगम परिणामों के अनुरूप रूपांतरित की जा सकती है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और शैक्षणिक रूप से सुदृढ़ बनती है। उन्होंने प्रतिभागियों को CO–PO गणना एवं कार्यक्रम परिणाम प्राप्ति (PO Attainment) के मूल्यांकन की व्यावहारिक पद्धतियों से भी अवगत कराया, जिनका उपयोग मान्यता और गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं में व्यापक रूप से किया जाता है।
हैंड्स-ऑन कार्यशाला (भाग-I) के दौरान प्रतिभागियों ने CO–PO मैपिंग, गणना मॉडल, और परिणाम प्राप्ति के मूल्यांकन की व्यावहारिक गतिविधियों का अभ्यास किया। यह सत्र अत्यंत सहभागितापूर्ण रहा, जिससे शिक्षकों को सैद्धांतिक अवधारणाओं को वास्तविक शैक्षणिक कार्यों में लागू करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में एक क्विज़ भी आयोजित की गई, जिसने प्रतिभागियों को तीन दिवसीय FDP से अर्जित ज्ञान का परीक्षण और उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया प्रतिभागियों तथा वक्ताओं द्वारा अपने विचार एवं फीडबैक साझा किए गए।समापन में वेलिडिक्ट्री सेशन आयोजित हुआ, जहाँ प्रतिभागियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया साझा की और इस FDP को NEP-2020 एवं OBE मानकों के अनुरूप परीक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी बताया।
अतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
डॉ. पवन पटनायक द्वारा कार्यक्रम का सार-संक्षेप प्रस्तुत किया गया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. नचिकेत तापस द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न तकनीकी संस्थानों से आए प्राचार्यों एवं संकाय सदस्यों के साथ आयोजन टीम के सदस्यों डॉ. नचिकेत तापस, डॉ. दीप्ति वर्मा, डॉ. तोरण वर्मा, डॉ. रोहित मिरी, शेषनारायण साहू, दिव्या शुक्ला, गौरव अग्रवाल, रमाकांत गंजेश्वर, पंकज स्वर्णकार, बसंती मिंज एवं अन्य फैकल्टी मेम्बर्स ने सक्रिय सहभागिता निभाई।




