तू लोकतंत्र का आधार रही।
जब यहाँ विचारधाराएँ जुटी
तू वटवृक्ष की भांति छांव बनी।
यह भवन मेरा विद्यालय था,
जिससे आगे अब जाना है।

मैं भावुक हूँ, आशान्वित हूँ
तेरे महत्व को ऐसे पहचाना है।
है प्रण मेरा कि सब अर्पित करके भी
नए सदन को नव गरिमा तक पहुंचाना है।
नमन तुझे मेरी विधानसभा………




