संदीप सिंह/बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान के बाद अब दूसरे और अंतिम चरण का मतदान कल यानी 11 नवंबर (सोमवार) को होने जा रहा है।
इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर कुल 3.70 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
यही चरण तय करेगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किस गठबंधन के हाथ जाएगी — एनडीए या महागठबंधन!
मुख्य आंकड़े एक नज़र में
बिंदु विवरण
मतदान की तारीख 11 नवंबर 2025 (सोमवार)
कुल विधानसभा सीटें 122
कुल मतदाता लगभग 3.70 करोड़
नए मतदाता लगभग 10.25 लाख
युवा मतदाता (18–19 वर्ष) करीब 7.5 लाख
महिला मतदाता लगभग 1.78 करोड़
पुरुष मतदाता लगभग 1.92 करोड़
उम्मीदवारों की संख्या 1,302
मतदान केंद्रों की संख्या 45,399 (शहरी 5,326 और ग्रामीण 40,073)
संवेदनशील बूथ 8,491 स्थान “अति संवेदनशील” घोषित
सुरक्षा बल 4 लाख से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात
मतगणना की तारीख 14 नवंबर 2025
20 जिलों में होगा मतदान
दूसरे चरण में पूर्वी बिहार और सीमांचल बेल्ट की 20 जिलों में वोटिंग होगी —
पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, कैमूर, रोहतास और लखीसराय शामिल हैं।
इन जिलों में जातीय समीकरण, सीमांचल की धार्मिक राजनीति, और विकास बनाम रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर है।
राजनीतिक समीकरण – अबकी बार किसकी बहार?
इस चरण में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है।
महागठबंधन से तेजस्वी यादव, विजय चौधरी, अजय यादव,
तो एनडीए से सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय, श्रवण कुमार जैसे नेता
अपने गढ़ बचाने की जद्दोजहद में हैं।
पहले चरण में जहां महिलाओं की वोटिंग ने राजनीति की हवा बदल दी,
वहीं दूसरे चरण में सीमांचल और मगध बेल्ट का प्रदर्शन यह तय करेगा कि पटना की गद्दी पर कौन बैठेगा।
महिला और युवा वोटर बनेगे “किंगमेकर”
पहले चरण में महिलाओं ने पुरुषों से 9% अधिक मतदान कर इतिहास रचा था।
अब दूसरे चरण में भी आयोग का अनुमान है कि महिलाओं की भागीदारी 70% के आसपास रह सकती है।
कुल मतदाताओं में लगभग 1.78 करोड़ महिलाएं हैं,
जबकि 18 से 19 वर्ष के 7.5 लाख युवा मतदाता भी इस चरण में पहली बार वोट डालेंगे।
राजनीतिक दलों ने महिला और युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए
“सशक्त नारी, आत्मनिर्भर बिहार” और “रोज़गार बनाम पलायन” को प्रमुख नारा बनाया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव आयोग ने इस चरण के लिए 4 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।
8,491 मतदान केंद्रों को “अति संवेदनशील” और
13,651 गांवों को सुरक्षा दृष्टि से कमजोर घोषित किया गया है।
ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और वेबकास्टिंग से हर मतदान केंद्र पर निगरानी होगी।
डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिया है —
“किसी भी बूथ पर गड़बड़ी या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
- चुनाव आयोग की सख्ती
- हर बूथ पर माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती
- मतपेटियों की सुरक्षा के लिए तिहरी निगरानी
- वीवीपैट मशीनों की रियल टाइम मॉनिटरिंग
- वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष मतदान व्यवस्था
चुनावी विश्लेषण: निर्णायक चरण
राजनीतिक पंडितों के अनुसार यह चरण किंगमेकर साबित होगा।
पहले चरण की तरह अगर वोटिंग का प्रतिशत 65% से ऊपर गया,
तो यह तय मानिए कि बिहार की सत्ता की बाज़ी पलट सकती है।
“महिलाओं की लहर, युवाओं का जोश, सीमांचल की जंग —
इन तीनों ने तय कर दिया है कि 14 नवंबर की सुबह बिहार की राजनीति में बड़ा विस्फोट होगा।”
अगला पड़ाव – 14 नवंबर की गिनती
11 नवंबर को मतदान के बाद अब सबकी नज़रें 14 नवंबर पर टिकेंगी,
जब मतगणना के बाद यह साफ होगा कि
कौन बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री, और किसकी नैया डूबेगी।
रिपोर्टर – संदीप सिंह
खबर आलोक डिजिटल डेस्क, पटना




