Saturday, January 17, 2026

मोदी की गारंटी 57,000 शिक्षकों की भर्ती की थी, फिर मात्र 4,700 पदों में भर्ती क्यों?

भाजपा सरकार 4,700 पदों में भर्ती कर शिक्षक भर्ती की तैयारी में लगे लाखों युवाओं के साथ धोखा कर रही

रायपुर। शिक्षा विभाग में शिक्षकों के मात्र 4,708 पद पर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी की गारंटी 57,000 शिक्षकों की भर्ती की थी, फिर 22 महीना बाद मात्र 4,708 पदों पर ही भर्ती क्यों की जा रही है, 57000 पदों पर भर्ती क्यों नहीं हो रही है? ये तो शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं के साथ धोखा है। सरकार बनने के तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा के भीतर 33,000 पदों पर भर्ती की घोषणा किया था। बजट में 20,000 पदों पर भर्ती का प्रावधान किया गया था। मुख्यमंत्री 5 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा किये, अब शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव 4,708 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करा रहे है। जिसमे पूर्व स्वीकृत 146 पद व्याख्याता कम्प्यूटर एवं 146 पद योग प्रशिक्षक उसे भर्ती प्रक्रिया से हटा दिया गया। आखिर क्यों?

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार के हठधर्मिता के चलते शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे युवाओं के मन में निराशा का भाव आया है, जिस प्रकार से वादा करके वादाखिलाफी की जा रही है, ऐसे में तो हजारों विषय विशेषज्ञ युवा आने वाले समय में सरकारी नौकरी की उम्र सीमा पार कर जाएंगे और परीक्षा से वंचित हो जाएंगे, उनकी जिंदगी खराब हो जाएगी और भाजपा सरकार की मंशा तो नौकरी देने की नहीं है, इसलिए भाजपा के जितने मंत्री हैं उनके शिक्षक भर्ती को लेकर अलग-अलग दावे हैं।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी की गारंटी में एक लाख सरकारी नौकरी देने का वादा था, 2 साल में तय वादे के अनुसार अब तक प्रदेश के 40,000 युवाओं को सरकारी नौकरी मिल जाना था। लेकिन भाजपा सरकार की नीतियों ने रोजगार दिया नहीं, बल्कि रोजगार छीना है। जिस प्रकार से पीएससी एवं व्यापम की परीक्षा में प्रश्न पत्र में त्रुटियां पाई जा रही है, परीक्षाये विवादास्पद हो रही है यह सरकार की सोची समझी रणनीति है, ताकि वह अधिक भ्रमित है कि सरकार ने तो भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन परीक्षाओं में त्रुटि होने के चलते उन्हें नौकरी नहीं मिला।

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