Sunday, January 18, 2026

अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में गरजे आचार्य डॉ. अजय आर्य

स्वामी दयानंद ही सनातन स्वाभिमान के शाश्वत प्रकाशस्तंभ

1000 विद्वान और 100000 (एक लाख) लोग जुड़े हैं इस कार्यक्रम से

राष्ट्र सेवा एवं सनातन धर्म की रक्षा के लिए आर्य समाज का किया आह्वान कल होगा प्रधानमंत्री का

दिल्ली। आर्य समाज की मानव सेवा को समर्पित 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दिल्ली में आयोजित चतुर्दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भिलाई (छत्तीसगढ़) के प्रख्यात वैदिक चिंतक एवं आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने जोशीले और शोधपरक वक्तव्य से समूचे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘सनातन स्वाभिमान के पुरोधा – स्वामी दयानंद सरस्वती’ विषय पर प्रस्तुत अपने शोधपत्र वह प्रस्तुत करते हुए अपने वक्तव्य में में उन्होंने कहा कि “स्वामी दयानंद सरस्वती ने केवल आर्य समाज की स्थापना करके समाज सुधार का बीड़ा नहीं उठाया, बल्कि गुलाम भारत को आत्मसम्मान और स्वतंत्र चिंतन की दिशा दी। उन्होंने भारतीय समाज की जकड़ी हुई परतंत्रता को तोड़ने का आह्वान किया और वैदिक विचार परंपरा को पुनर्जीवित कर राष्ट्र के स्वाभिमान की ज्योति जलायी।”

आचार्य डॉ. आर्य ने कहा कि उस युग में जब भारतीय समाज गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और स्वाभिमान लुप्तप्राय था, तब स्वामी दयानंद ने यह उद्घोष किया कि वेद ज्ञान का शाश्वत स्रोत है और उसमें कहीं भी मानवता-विरोधी कोई विचार नहीं है। उन्होंने तर्क, विवेक और विज्ञान के आलोक में वैदिक धर्म को प्रमाणित किया।
उन्होंने कहा-
‘यदि आज हम सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो स्वामी दयानंद सरस्वती से श्रेष्ठ कोई मार्गदर्शक नहीं हो सकता। उन्होंने 1873 में ही ‘स्वदेशी राज्य सर्वोपरि है’ का उद्घोष किया था, जिसे आगे चलकर तिलक और अन्य क्रांतिकारियों ने आत्मसात किया।’

डॉ. अजय आर्य ने यह भी कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने मनुस्मृति और वैदिक सिद्धांतों के आधार पर यह प्रमाणित किया कि भारत विश्वगुरु रहा है। उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा-
‘भारत ही वह पारसमणि है जिसे छूकर विदेशी स्वर्ण समान समृद्ध हो गए। स्वामी दयानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक, व्यवहारिक और अनुकरणीय हैं।’ उन्होंने आह्वान किया कि पूर्वाग्रहों को त्यागकर स्वामी दयानंद के विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है, क्योंकि वेद को स्वामी दयानंद के बिना समझा ही नहीं जा सकता। योगीराज अरविंद और लोकमान्य तिलक जैसे क्रांतिकारियों ने भी स्वामी दयानंद को आदर्श और पूजनीय माना। सत्र के दौरान सार्वदेशिक आर्य पुरोहित सभा ने स्कंधवस्त्र पहनाकर आचार्य डॉ. अजय आर्य का गरिमामय स्वागत एवं सम्मान किया।

छत्तीसगढ़ से आए दूसरे विद्वान आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ने अपने वक्तव्य में कहा-
‘महर्षि दयानंद न केवल समाज सुधारक थे, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता के वैचारिक शिल्पकार भी थे। उनका चिंतन ही आज के भारत का आधार है।’
चार दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में 40 देशों से आर्य प्रतिनिधि सम्मिलित हो रहे हैं। एक हजार से अधिक विद्वान अपने वैचारिक मंथन से नई दृष्टि प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मिलित होने की घोषणा की गई है।
कार्यक्रम में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के उपस्थित होने का अनुमान है, वहीं 5000 युवा आर्यवीर एक साथ शारीरिक व्यायाम का प्रदर्शन करेंगे। छत्तीसगढ़ से 200 से अधिक युवा आर्यवीर दल के रूप में भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर निर्मित “दयानंद नगर” में गौशाला, यज्ञशाला, पुस्तक विक्रय केंद्र, क्रांतिकारी प्रेरणास्थल, और स्वामी दयानंद के विचारों पर आधारित अनेक प्रदर्शनी, बच्चों के लिए सांस्कृतिक केंद्र, चलचित्र गृह, व्यायाम शाला भोजन शाला आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। लगभग 10,000 लोग यहीं निवास कर रहे हैं।

महासम्मेलन का वातावरण वैदिक ऊर्जा, राष्ट्रभक्ति और सनातन स्वाभिमान के उद्घोष से गूंज उठा है। आर्य समाज सेक्टर 6 भिलाई दुर्ग रायपुर सहित देशभर की आर्य समाज और सैकड़ो संस्थाएं इस कार्यक्रम में अपनी भूमिका निभा रही है।

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