Saturday, January 17, 2026

उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर संपन्न हुआ छठ महापर्व — श्रद्धा, शुद्धता और अनुशासन का अनोखा संगम

खबर आलोक टीम, बिहार। आज सुबह बिहार के हर घाट पर एक ही दृश्य था — सूरज की पहली किरण के साथ “जय छठी मइया!” के जयघोष गूंज उठे। लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ का समापन उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर हो गया।

सूर्यदेव के स्वागत में डूबा बिहार

सुबह 3 बजे से ही व्रती महिलाएँ अपने परिजनों के साथ घाटों पर पहुंचने लगी थीं।
मंद-मंद बहती हवा, ठंडा पानी, और आसमान में हल्की लालिमा — सब मिलकर ऐसा दृश्य बना रहे थे जो केवल बिहार में ही देखा जा सकता है।

महिलाएँ जल में खड़ी होकर दोनों हाथों से सूर्यदेव को अर्घ्य दे रही थीं।
साथ में बज रहे लोकगीत —

“कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…”
ने वातावरण को पूरी तरह भाव-विभोर कर दिया।

हर चेहरे पर श्रद्धा, हर मन में शांति

अर्घ्य के समय घाटों पर कोई भेद नहीं दिखा —
सवर्ण, पिछड़ा, दलित, गरीब, अमीर — सब एक ही जलधारा में खड़े होकर सूर्यदेव से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे थे।

बच्चे अपनी मां की सुपली थामे खड़े थे, तो बुजुर्ग हाथ जोड़ सूर्य को प्रणाम कर रहे थे।
पूरे बिहार में ऐसा दृश्य था मानो आस्था और अनुशासन का महासंगम हो।

“आस्था का महाकुंभ” बना बिहार

पटना, गया, भागलपुर, सीवान, दरभंगा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर — हर जिले के घाटों पर लाखों श्रद्धालु मौजूद रहे।
प्रशासन की मुस्तैदी और लोगों की अनुशासनप्रियता ने इस विशाल आयोजन को “आस्था का महाकुंभ” बना दिया।

हर घाट पर “जय सूर्यदेव”, “जय छठी मइया” के नारे, गीतों की गूंज और दीपों की जगमगाहट ने इस सुबह को अविस्मरणीय बना दिया।

विदेशों में भी दिखा छठ का उत्सव

अमेरिका, दुबई, लंदन, सिंगापुर और मॉरीशस में बसे प्रवासी बिहारी समुदायों ने भी आज सुबह सूर्य अर्घ्य दिया।
कृत्रिम तालाबों पर बनावटी घाट सजाकर, पारंपरिक परिधान में परिवारों ने बिहार की संस्कृति को जीवंत किया।

न्यू जर्सी में बसे एक श्रद्धालु ने कहा —

“हम चाहे कहीं रहें, छठ मइया हमारी मिट्टी की खुशबू से जोड़ देती हैं।”

खबर आलोक टीम की विशेष कवरेज

खबर आलोक की टीम ने पटना के कंकड़बाग घाट, गया के फल्गु नदी तट, और मुजफ्फरपुर के सीता घाट से लाइव रिपोर्टिंग की।
टीम ने श्रद्धालुओं से उनकी भावनाएँ जानीं, घाटों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था और भक्ति गीतों की झलकियाँ कैमरे में कैद कीं।

पटना के एक व्रती ने कहा —

“छठ केवल पर्व नहीं, हमारी पहचान है। यही बिहार की आत्मा है।”

बिहार की पहचान – आस्था, अनुशासन और अपनापन

चार दिन के इस महापर्व ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बिहार की ताकत उसकी संस्कृति और एकता में है।
छठ मइया के प्रति यह निष्ठा हर वर्ष बिहार को जोड़ती है, प्रेरित करती है और विश्व को एक संदेश देती है —

“जहाँ आस्था हो, वहाँ असंभव कुछ नहीं।”

निष्कर्ष : बिहार की मिट्टी से उठी आस्था की लौ

छठ मइया के इस महापर्व ने एक बार फिर बिहार को गौरवान्वित किया है।
जब सूरज की पहली किरणें घाटों के जल पर पड़ीं, तो लगा मानो पूरा बिहार विश्व को अपनी आस्था का संदेश दे रहा हो।

“जय छठी मइया 🙏 — खबर आलोक टीम, बिहार की धरती से सीधा प्रसारण”

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