आर्य समाज ने दीप जला करके सत्यार्थ प्रकाश के लेखक को याद किया
आर्य समाज दुर्ग ने दीप जलाकर किया सत्यार्थ प्रकाश का स्मरण
दुर्ग। दीपावली के पावन अवसर पर आर्य समाज दुर्ग में श्रद्धा और उत्साह के साथ दीप प्रज्वलन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के समक्ष ऋषि दयानंद सरस्वती के सत्य, न्याय और मानवता के संदेश को पुनः स्मरण कराना था। आर्य समाज परिसर में सैकड़ों दीपों से वातावरण आलोकित हो उठा और वैदिक मंत्रों की गूँज ने आध्यात्मिकता का पवित्र वातावरण निर्मित किया।
आचार्य अंकित शास्त्री ने वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करते हुए ‘वेद मंत्र पाठ’ प्रस्तुत किया, जिससे सभा में ओज और श्रद्धा का संचार हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान अवनी भूषण पुरंग ने की तथा मंत्री प्रवीण गुप्ता ने संचालन एवं विचार-विनिमय का कार्य संभाला।

प्रधान अवनी भूषण पुरंग ने अपने उद्बोधन में कहा- “ऋषि दयानंद ने जिस सत्य और स्वराज की अलख जगाई, वही आगे चलकर भारत की स्वतंत्रता का वैचारिक आधार बनी। सत्यार्थ प्रकाश केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि वह दीप है जिसने युगों को दिशा दी। हमें आज के समाज में भी उस वैचारिक ज्योति को प्रज्वलित रखना है।”
मंत्री प्रवीण गुप्ता ने कहा- “दीपावली केवल उत्सव नहीं, आत्मज्योति के जागरण का पर्व है। जब तक समाज में अज्ञान, असमानता और रूढ़ियाँ हैं, तब तक सत्यार्थ प्रकाश का संदेश प्रासंगिक रहेगा। आर्य समाज का हर कार्य इसी जागृति का प्रतीक है।”

इस अवसर पर आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने संदेश में कहा— “स्वामी दयानंद केवल धर्म सुधारक नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण के सूत्रधार थे। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के भीतर सत्य, विज्ञान और मानवता की ज्योति प्रज्वलित की। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि विचार और कर्म जब एक दिशा में चलते हैं, तब युग परिवर्तन संभव होता है।”
कार्यक्रम में जवाहरलाल सरपाल, प्रमिला सरपाल, यतींद्र पुरंग, सोनिया पुरंग सहित अनेक आर्यजन एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन वैदिक मंगलाचरण, दीप वितरण और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सामूहिक उद्घोष के साथ हुआ।




