Saturday, January 17, 2026

कैग की आपत्तियों पर सेल के जिम्मेदार अधिकारियों पर कारवाई करे इस्पात सचिव — बीएकेएस भिलाई

गलत इन्वेंट्री प्रबंधन तथा कोयले के अत्याधिक खपत के मुद्दे पर कैग द्वारा की गई आपत्तियों पर बिएकेएस ने लिखा कड़ा पत्र

भिलाई। बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने इस्पात सचिव को पत्र लिखकर दोषी तथा जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कारवाई करने का माँग किया है ।
भारत के नियंत्रक एवं लेखा परिक्षक ने सेल के गलत इंवेंट्री नीतियों तथा कोयले की अत्याधिक खपत के कारण सेल को हुए भारी आर्थिक नुकसान पर एक रिपोर्ट दिनांक 29 जुलाई 2025 को संसद मे पेश किया है । जिसमें सेल प्रबंधन की गलत कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाया गया है । गलत प्रबंधकीय क्षमता के कारण कंपनी को हजारो करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

कैग द्वारा दर्ज की गई आपत्तियाँ

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने इन्वेंट्री के लिए कोई मानक तय नहीं किया था। कच्चे माल, अर्ध-तैयार माल और तैयार माल की प्रति टन लागत, इस तथ्य के बावजूद कि 2016-17 से 2022-23 के दौरान औसतन, इसकी इन्वेंट्री ₹21,698 करोड़ थी, जो इसकी वर्तमान परिसंपत्तियों का लगभग 67 प्रतिशत है।

सेल लौह अयस्क, कोक, सिंटर जैसे कच्चे माल के स्टॉक स्तर को बनाए रखने में विफल रहा, जिसके कारण ब्लास्ट फर्नेस को ऑफ-ब्लास्ट अवस्था में रखा गया, जिसके परिणामस्वरूप राउरकेला, बोकारो और दुर्गापुर इस्पात संयंत्रों में 9.32 लाख टन हॉट मेटल का उत्पादन और ₹1,231.52 करोड़ का संभावित राजस्व अर्जित करने में असमर्थता रही।
सेल नन मुविंग इन्वेंट्री के मानदंडों को बनाए नहीं रख सका क्योंकि नन मुविंग इन्वेंट्री सेल में कुल इन्वेंट्री के 6.10 प्रतिशत से 8.38 प्रतिशत के बीच थी, जो 2016-17 से 2022-23 के दौरान कुल इन्वेंट्री के तीन प्रतिशत के मानदंड से हमेशा अधिक थी। सेल संयंत्रों में भंडार और पुर्जों की कुल गैर-चलती इन्वेंट्री 2016-17 में ₹137.40 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में ₹212.57 करोड़ हो गई, जो ₹75.17 करोड़ (55 प्रतिशत) की वृद्धि दर्शाती है। आवश्यकता पर विचार किए बिना इन्वेंट्री की अधिक खरीद के परिणामस्वरूप गैर-चलती वस्तुओं में पूंजी अवरुद्ध हो गई।

इन्वेंट्री की खरीद
सेल के इस्पात संयंत्रों ने 2016-2023 के दौरान 9.71 प्रतिशत मामलों में संबंधित विभाग द्वारा मांगपत्र जारी करने और खरीद आदेश जारी करने के बीच निर्धारित छह महीने (186 दिन) के समय से अधिक समय लिया।

सेल ने 2020-21 में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड से ईंधन आपूर्ति समझौते की मात्रा (0.48 मिलियन टन) का 152.73 प्रतिशत उठाया, जबकि मौजूदा ईंधन आपूर्ति समझौतों के तहत अन्य आपूर्तिकर्ताओं से सस्ता कोयला उपलब्ध था। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड से 0.17 मिलियन टन कोयले की अतिरिक्त खरीद के परिणामस्वरूप ₹4.65 करोड़ का परिहार्य व्यय हुआ।

सेल के इस्पात संयंत्रों ने प्रबंधन द्वारा निर्धारित मानदंडों से अधिक आयातित कोयले की खपत की। स्वदेशी कोयले की तुलना में महंगे आयातित कोयले की अधिक खपत के परिणामस्वरूप
वर्ष 2016-2023 के दौरान ₹2,539.68 करोड़ तक का संभावित अतिरिक्त व्यय हुआ। भिलाई और राउरकेला के सिंटर संयंत्रों में चूना पत्थर, डोलोमाइट और लौह अयस्क चूर्ण की खपत मानकों से अधिक थी, जिसका मूल्य ₹349.39 करोड़ था। विश्वेश्वरैया लौह एवं इस्पात संयंत्र और सेलम इस्पात संयंत्र में, ₹66.46 करोड़ मूल्य के हल्के डीजल तेल, फर्नेस तेल और एलपीजी की खपत कंपनी द्वारा निर्धारित मानदंडों से अधिक थी।

बोकारो इस्पात संयंत्र में पारंपरिक लैडल कार को टॉरपीडो लैडल कार से बदलने में देरी के कारण ब्लास्ट फर्नेस से स्टील मेल्टिंग शॉप तक पिघले हुए लोहे के परिवहन में दो से तीन प्रतिशत की तुलना में 3.03 से 4.54 प्रतिशत की अधिक पारगमन हानि हुई। इसके परिणामस्वरूप ₹400.76 करोड़ मूल्य के हॉट मेटल के पारगमन नुकसान में कमी का अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं हो सका।

इन्वेंट्री की बिक्री और निपटान
सेल के पाँच एकीकृत इस्पात संयंत्र 2016-2023 की अवधि के लिए वार्षिक व्यावसायिक योजना में परिकल्पित 119.66 मिलियन टन विक्रय योग्य इस्पात के उत्पादन लक्ष्य का 106.15 मिलियन टन (89 प्रतिशत) उत्पादन कर सके। इन इस्पात संयंत्रों द्वारा क्षमता उपयोग 77 प्रतिशत (2020-21) और 89 प्रतिशत (2022-23) के बीच था। (पैरा 6.2)
कुल 106.15 मिलियन टन विक्रय योग्य इस्पात उत्पादन और केंद्रीय विपणन संगठन द्वारा बुक किए गए 121.86 मिलियन टन के ऑर्डरों के मुकाबले, संयंत्रों से प्रेषण केवल 93.75 मिलियन टन था, यानी बुक किए गए ऑर्डरों का 77 प्रतिशत। ग्राहकों की आवश्यकता से कम सामग्री प्रेषण के कारण स्टॉक के परिसमापन में देरी हुई और इस्पात संयंत्रों में पड़े स्टॉक पर इन्वेंट्री वहन लागत में वृद्धि हुई।

31 मार्च 2023 तक दल्ली और बरसुआ खदानों में ₹492 करोड़ मूल्य का 102.72 लाख टन टेलिंग फाइन्स/स्लाइम पड़ा हुआ था। उपरोक्त के अलावा, बोलानी, किरीबुरू और मेघाहाटबुरू लौह अयस्क खदानों में 116.85 लाख टन टेलिंग फाइन्स/स्लाइम जमा था और उसका निपटान नहीं किया गया था।
जिसका मूल्यांकन नहीं किया गया था।

यूनियन ने अपने पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि कैग द्वारा 19 बिंदुओं पर आपत्ती करना सेल के आंतरिक सिस्टम मे व्याप्त खाँमियों का सबुत है । इससे साबित हो रहा है कि उपरोक्त अवधि मे सेल के विभिन्न पदो पर नियुक्त अधिकारियों ने कर्त्वयनिष्ठा , पारदर्शिता के साथ काम नही किया है । जबकि उस दौरान उच्च पद पर बैठे सभी अधिकारियों को पुर्ण वेतन/भत्ता , पीआरपी के साथ बाकि सुवाधाएँ दी गई । साथ ही अधिकतर उच्चअधिकारी को ACR मे उच्च ग्रेड दिया गया , जिसका लाभ उन्हे वर्तमान मे सेल के उच्च पद पर नियुक्ति के रुप मे मिला है।

इस पत्र के माध्यम से यूनियन ने माँग किया है कि वैसे उच्च अधिकारी जो सेवानिवृत हो गए है , उनके पेंशन का भुगतान बंद कराया जाय तथा उन पर कानुनी कारवाई (पद के अनुसार कार्य नही करने, कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुँचाने ) हेतु प्राथमिकि दर्ज कराई जाय । साथ ही अभी के सेल के सभी उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी जाँच हो (क्योकि अभी के अधिकतर उच्च अधिकारी उस समय सेल मे ,निदेशक प्रभारी , अधिशासी निदेशक तथा मुख्य महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत थे) तथा गलत नीतियों मे शामिल होने पर उनको पुराने पद पर डिग्रेड किया जाय तथा कानूनी कारवाई भी किया जाय क्योकि गलत नीतियों के कारण कंपनी को हजारो करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है ।

बयान,
मात्र 1300—1400 करोड़ रुपया एरियर मद में देने के लिए कंपनी प्रबंधन के पास इच्छाशक्ति नही है , लेकिन उनकी गलत कार्यप्रणाली के कारण कंपनी को कई हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ गया है ।
कैग जैसी संस्था उसको प्रमाणित भी कर रही है ।
नवीन कुमार मिश्रा , कोषाध्यक्ष , बीएकेएस , भिलाई ।

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