आलोक तिवारी पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब तक एनडीए और महागठबंधन के बीच होने वाले सीधे मुकाबले में नई पार्टी जन सुराज ने तीसरी ताकत के रूप में दस्तक दे दी है।
राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने न सिर्फ समीकरणों को उलझा दिया है बल्कि एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए सिरदर्द बन चुके हैं।
सी-वोटर सर्वे में बड़ा उलटफेर
हाल ही में जारी C-Voter सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर बिहार की जनता की पहली पसंद तेजस्वी यादव हैं जिन्हें करीब 36% समर्थन मिला है।
वहीं, जन सुराज के प्रशांत किशोर को 24% लोगों ने पसंदीदा मुख्यमंत्री चेहरा बताया है — जो किसी भी नई पार्टी के लिए बेहद अहम आंकड़ा है।
तीसरे स्थान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16% समर्थन के साथ फिसल गए हैं, जबकि चिराग पासवान को 9% लोगों ने समर्थन दिया है।
इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार मुकाबला सिर्फ दो गठबंधनों के बीच नहीं रहेगा — बल्कि जन सुराज तीसरी सबसे मजबूत राजनीतिक धुरी बनकर उभरी है।
एनडीए की मुश्किलें बढ़ीं, जन सुराज की आक्रामक रणनीति
प्रशांत किशोर लगातार एनडीए सरकार और उसके नेताओं पर निशाना साध रहे हैं।
उनके तीखे बयानों ने भाजपा और जदयू दोनों को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस बार बिहार चुनाव में एनडीए की कमजोर स्थिति का सबसे बड़ा कारण जन सुराज की सक्रियता है।
किशोर का कहना है कि जन सुराज “बिहार की जनता के असली मुद्दों” पर चुनाव लड़ेगी — न कि जात-पात या धर्म की राजनीति पर।
उन्होंने घोषणा की है कि पार्टी सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और खुद भी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
सूत्रों के अनुसार, वे करगहर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतर सकते हैं।
संभावित उम्मीदवारों की चर्चा तेज
जन सुराज की पहली सूची जल्द जारी होने वाली है, लेकिन कई नाम पहले से चर्चा में हैं —
- एकमा से विकास सिंह
- रफीगंज से शगुफ्ता यशमीन
- भभुआ से जैनेन्द्र जानी आर्य
- काराकाट से योगेंद्र सिंह मुखिया
- कुमरार से वंदना कुमारी
- ढाका (पूर्वी चंपारण) से डॉ. एल. बी. प्रसाद
- इसके अलावा नीरज सिंह (शिवहर), कुसुम लता वर्मा और RCP सिंह के नामों की भी चर्चा है।
- यदि इन क्षेत्रों में जन सुराज ने मजबूत प्रत्याशी उतार दिए, तो वोट बैंक का बड़ा हिस्सा पारंपरिक गठबंधनों से खिसक सकता है।
–तीसरी धुरी बनने की राह पर जन सुराज
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बिहार में जन सुराज “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकती है।
प्रशांत किशोर के ग्रामीण पदयात्रा अभियान और जनता के बीच सीधा संवाद उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण बना है।
पार्टी लगातार “बदलाव की राजनीति” और “ईमानदार नेतृत्व” की बात कर रही है, जिससे नए और युवा वोटरों में आकर्षण बढ़ रहा है।
एनडीए और महागठबंधन के लिए दोहरी चुनौती
जहां महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में एकजुट होने की कोशिश कर रहा है, वहीं एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं।
जन सुराज के मैदान में उतरने से वोटों का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जन सुराज “ग्राउंड लेवल पर मजबूत प्रत्याशी” उतारने में कामयाब रही, तो 2025 का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबला बन जाएगा।
प्रशांत किशोर का आत्मविश्वास
प्रशांत किशोर का कहना है —
“बिहार में अब जनता वही करेगी, जो उसके हित में होगा। अब राजनीति न जाति की होगी, न धर्म की — बल्कि विकास की होगी।”
उनके इस बयान से साफ है कि वे खुद को बदलाव की राजनीति का प्रतीक बनाना चाहते हैं।
यदि सर्वेक्षणों का ट्रेंड जमीनी वोटों में बदल गया, तो जन सुराज बिहार की सत्ता समीकरण में सबसे बड़ी चाबी बन सकती है।
सी वोटर सर्वे में रोचक चुनावी संघर्ष
- सी-वोटर सर्वे से निकले नतीजों ने बिहार चुनाव की दिशा बदल दी है।
- तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच पारंपरिक जंग अब प्रशांत किशोर बनाम सभी के रूप में बदलती दिख रही है।
- राज्य की राजनीति में यह पहली बार होगा जब एक नई पार्टी इतने कम समय में इस स्तर की लोकप्रियता हासिल कर रही है।
- अब सबकी निगाहें जन सुराज की पहली उम्मीदवार सूची और प्रशांत किशोर के विधानसभा क्षेत्र पर टिकी हैं।




