संस्कार और उन्नत समृद्ध वैदिक परंपरा हेतु पुजारी पुनर्प्रशिक्षण शिविर: धर्म स्तंभ काउंसिल
रायपुर।अखिल भारतीय पुजारी पुरोहित संघ की बैठक उपरांत धर्म स्तम्भ काउंसिल के सभापति डॉ सौरव निर्वाणी ने बताया कि तीन अक्टूबर से पाँच अक्टूबर तक राधाकृष्ण मंदिर नवागढ़, बाला बावा मंदिर राजनंदगांव और रामजानकी मंदिर रायपुर में तीन दिवसीय पुनर्प्रशिक्षण संस्कार शिविर का आयोजन होगा। इसमें मंदिरों के पुराने पुजारियों एवं नवसेवकों को पूजा-अर्चना की सम्पूर्ण शास्त्रसम्मत विधि सिखलाई जाएगी। भोजन व ठहरने की व्यवस्था धर्म स्तंभ काउंसिल द्वारा की गई है तथा प्रशिक्षण पश्चात पुजारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।प्रदेश अध्यक्ष महंत सुरेंद्र दास ने घोषणा की कि राज्य के विभिन्न मठ-मंदिरों में सेवा करने वाले पुजारियों एवं सेवायतों के लिए यह निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर है। इसमें निम्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा –
- भगवान का श्रृंगार एवं अलंकरण कला
- मौली बंधन की विधि, मंत्रोच्चारण एवं संहिता-पाठ
- भोग भंडार व्यवस्था, पट खोलने एवं बंद करने की विधि
- नित्य एवं विशेष आरती विधान, भजन संध्या एवं संकीर्तन पद्धति
- भक्त संवाद शैली एवं प्रश्नोपचार
- भगवान विग्रह का अभिषेक एवं स्नान-मंडल विधान
- शुद्धाचार, आचार्य मर्यादा एवं वैदिक सेवा प्रणाली
धर्म स्तंभ कौंसिल के डॉ. रवीन्द्र द्विवेदी ने बताया कि पुजारियों की वेषभूषा नियमावली भी निर्धारित की गई है –
- धोती व उपरना (सफेद या भगवा रंग)
- माथे पर तिलक रामानुज, वैष्णव, शैव या शाक्त परंपरा अनुसार
- गले में रुद्राक्ष/तुलसी की माला
- नंगे पैर अथवा मंदिर योग्य पादुका
- चमड़े से बने वस्त्र/सामग्री का निषेध
प्रशिक्षण विभाग प्रमुख रूपेश पांडेय ने स्पष्ट किया कि मंदिर में पुजारी सदैव मधुर वाणी, धैर्य और नम्रता का पालन करें। मंदिर प्रांगण में संयम, समयपालन और शुद्धाचार आवश्यक है। मद्य-मांस और अपवित्र वस्तुओं का निषेध रहेगा, और यदि कोई पुजारी निजी जीवन में भी इसका पालन न करे तो वह मंदिर में पूजा करने की पात्रता खो देगा। भक्तों से संवाद में धार्मिक गरिमा और शिष्टाचार अनिवार्य होगा।डॉ सौरव निर्वाणी ने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य है— मठ-मंदिरों के पुजारियों को शास्त्रसम्मत परंपराओं का पालन कर भक्तों को संस्कारित सेवा प्रदान करने योग्य बनाना, ताकि पुजारियों की गरिमा और प्रतिष्ठा पुनः स्थापित हो। यह शिविर अखिल भारतीय पुजारी पुरोहित संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकुमार बालादास के मार्गदर्शन में संचालित होगा।धर्म स्तंभ कौंसिल का मानना है कि समाज को योग्य आचरणशील पुजारियों को सम्मान देना चाहिए और विरुद्ध आचरण करने वालों का बहिष्कार होना चाहिए। “मठ-मंदिरों की आत्मा, उनके पुजारी और सेवायत ही हैं। यदि वे शुद्धाचार, शास्त्रसम्मत ज्ञान और मर्यादाओं से सम्पन्न हों, तो सम्पूर्ण समाज धर्ममय और संस्कारित बनेगा।”




