Sunday, January 18, 2026

प्रभारी महापात्र ने फ्रंटलाइन अधिकारियों से साझा किए संगठनात्मक विकास के सुझाव….

भिलाई : भिलाई इस्पात संयंत्र में फ्रंटलाइन अधिकारियों और निदेशक प्रभारी चित्त रंजन महापात्र के बीच सीधे संवाद के उद्देश्य से ‘प्रत्यक्ष संवाद शेपिंग ग्रोथ थ्रू डायरेक्ट कम्युनिकेशन’ शीर्षक से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में ई-0 (जूनियर मैनेजर्स) से लेकर ई-5 (सहायक महाप्रबंधक) स्तर तक के लगभग 110 फ्रंटलाइन अधिकारियों ने भाग लिया और संयंत्र की प्रगति, कार्यप्रणालियों और चुनौतियों पर खुले विचार साझा किए।कार्यक्रम की शुरुआत उप प्रबंधक (जनसंपर्क) शालिनी चौरसिया द्वारा संयंत्र की उत्पादन उपलब्धियों, वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियों पर प्रस्तुति से हुई। इसके बाद कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम ने संयंत्र की वित्तीय स्थिति, लागत कारकों का प्रभाव, लाभप्रदता बढ़ाने की रणनीतियों और भावी योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

मुख्य सत्र में अधिकारियों ने संचालन, अनुरक्षण, कच्चे माल की उपलब्धता, सुरक्षा जागरूकता, ठेका श्रमिक व्यवस्था, बजट अनुपालन, मशीन ब्रेकडाउन और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव साझा किए।

अधिकारियों ने कार्यकुशलता बढ़ाने, सुरक्षा मजबूत करने, कार्यस्थल की स्वच्छता और डिजिटलीकरण अपनाने जैसी पहल की अनुशंसा की।निदेशक प्रभारी चित्त रंजन महापात्र ने अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि ये विचार व्यावहारिक और लागू करने योग्य हैं। उन्होंने अधिकारियों को परिवर्तनकारी दृष्टिकोण अपनाने और संयंत्र की नई ऊँचाइयों की दिशा में योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही अन्य सेल इकाइयों और निजी उद्योगों की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन कर नवाचार के साथ उन्हें बीएसपी में लागू करने का सुझाव भी दिया।कार्यपालक निदेशक प्रवीण निगम ने टीम भावना के साथ काम करने और सुरक्षा मानकों का कठोर अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा में अनुशासन और संचालन में जवाबदेही दीर्घकालिक सफलता की नींव हैं।इस अवसर पर महाप्रबंधक (सम्पर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी ने स्वागत भाषण दिया और सत्र के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन उप प्रबंधक शालिनी चौरसिया ने किया।यह पहला ‘प्रत्यक्ष संवाद’ सत्र था और संयंत्र ने भविष्य में ऐसे सत्र नियमित रूप से आयोजित करने की योजना बनाई है, जिससे संगठनात्मक विश्वास, जुड़ाव और प्रगति को और मजबूती मिले।

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