भिलाई नगर भारत सरकार का एक प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम, भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी), पिछले तीन दिनों से गंभीर व्यवधान का सामना कर रहा है। ट्रक चालकों और लिफ्टरों द्वारा संयंत्र में ट्रकों की आवाजाही को अवरुद्ध करने के कारण कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों का सड़क मार्ग से प्रेषण (डिस्पैच) पूरी तरह से ठप हो गया है। यह व्यवधान तब शुरू हुआ जब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की रिपोर्ट के आधार पर कुछ लिफ्टरों और पर्यवेक्षकों को उनकी अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसके विरोध में लिफ्टरों और ट्रक एवं ट्रेलर एसोसिएशन ने संयंत्र के प्रवेश और निकास मार्गों को अवरुद्ध कर दिया है।राजस्व और राष्ट्रीय हितों पर प्रभावबीएसपी के उत्पाद, जैसे रेल, प्लेट और हैवी बीम्स, राष्ट्रीय निर्माण परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संयंत्र के इस तरह बाधित होने से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति प्रभावित हो रही है।
यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ से केंद्र और राज्य सरकारों को सर्वाधिक राजस्व कर का भुगतान करता है। इस व्यवधान के कारण सरकारी राजस्व को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है।प्लांट में लोडिंग और अनलोडिंग प्रक्रिया के पूरी तरह रुक जाने से उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति बीएसपी के लिए ही नहीं, बल्कि उस पर निर्भर स्थानीय व्यवसायों और श्रमिकों के लिए भी हानिकारक है। कुछ व्यक्तियों द्वारा की गई अनियमितताओं के बावजूद, इस प्रतिष्ठित संस्थान को इस तरह से पंगु करने का प्रयास किया गया है, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय हितों पर प्रहार है।
प्रबंधन की कार्यवाही बीएसपी प्रबंधन इस पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रख रहा है और इस व्यवधान को समाप्त करने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन को भी अवगत करा दिया गया है। प्रबंधन इस मामले में भविष्य की वैधानिक कार्रवाइयों पर भी विचार कर रहा है ताकि संयंत्र के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया जा सके।यह स्थिति सरकारी कार्य में बाधा डालने के साथ-साथ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हितों को भी प्रभावित कर रही है, और प्रबंधन इस अवरोध को जल्द से जल्द दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रबंधन ने जिला और पुलिस प्रशासन से भी संपर्क किया है और भविष्य में कई जा सकने वाली विधिक कार्यवाही पर भी विचार कर रहा है ।




