खाद्य विभाग पर उठे सवाल
दुर्ग। दुर्ग जिले में अवैध मिक्सचर, बिस्किट और कुकीज का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। खाद्य एवं औषधि विभाग की चुप्पी ने इस अवैध कारोबार को और बढ़ावा दिया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बड़ी फैक्ट्री बड़ी सैटिंग
यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये अवैध फैक्ट्रियां बिना किसी मानक का पालन किए खाद्य सामग्री बना रही हैं। इन उत्पादों में न तो कोई ब्रांड का नाम होता है और न ही उन पर एक्सपायरी डेट दर्ज होती है। स्थानीय उपभोक्ता शिशिर कसर के मुताबिक, ये उत्पाद गली-मोहल्लों में धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, जिन्हें खासकर छोटे बच्चे खरीद रहे हैं। इन उत्पादों पर FASSI लाइसेंस नंबर भी नहीं होते, जो इनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर बड़ा संदेह पैदा करता है।
दीपावली का त्योहार नजदीक होने के कारण इन अवैध उत्पादों का उत्पादन और खपत दोनों बढ़ गई है। उपभोक्ता अनूप सिन्हा ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे बच्चे भी ये उत्पाद खाते हैं और अगर उन्हें कुछ हो जाए, तो सब कुछ भगवान भरोसे है।”
समय समय पर होती है कारवाई
जिला स्वास्थ्य अधिकारी मनोज दानी ने बताया कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसके बावजूद ये अवैध उत्पाद बेरोकटोक बिक रहे हैं। अतीत में भी दुर्ग में ऐसी कई अवैध फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं जहाँ मिलावट करके खाद्य पदार्थ बनाए जा रहे थे। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि जब जिला प्रशासन को इन अवैध कारोबारियों की जानकारी है, तो उन पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। खाद्य एवं औषधि विभाग की यह लापरवाही जिले के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।




