Sunday, January 18, 2026

पीतर पक्ष की अष्टमी को सिन्धी समाज का पौराणिक महालक्ष्मी पर्व साईं झूलेलाल धाम 32 एकड़ हाऊसिंग बोर्ड भिलाई में मनाया गया। घर के सदस्यों की संख्या के अनुसार दिये जलाकर एवं अनेकों व्यंजनों का भोग लगाकर विश्व में आरोग्य एवं कल्याण की प्रार्थना कर मनाया पर्व।

भिलाई। सांई झूलेलाल धाम 32 एकड़ हाऊसिंग बोर्ड भिलाई में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पीतर पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रविवार को सिंधी समाज के सभी लोगों ने इस दिन को सामाजिक प्रथा के अनुरूप महालक्ष्मी पर्व के रूप में मनाया। इस दिन समाज की महिलायें अपने घर के सभी सदस्यों के हाथों में राधाष्टमी के दिन बांधे हुए रक्षा सूत्र को पीतर पक्ष की अष्टमी तिथि को इस रक्षासूत्र(सगड़े) को खोलकर सोरी (मीठे पकवान) में बांधकर,घर के सदस्यों की संख्या के हिसाब से आरती के उतने दिये आरती की थाली सजा कर झूलेलाल धाम में उपस्थित हुई।इसके साथ ही सेवईं सहित और भी अन्य मीठे पकवान बना कर इस पर्व पर माता महालक्ष्मी को भोग लगाया। और इस पर्व से संबंधित पौराणिक एक प्रचलित कथा सुनने रात्रि 07:00 बजे से 08:30 झूलेलाल धाम पहुंची।और वहां कथा सुनने के बाद सभी पकवानों का भोग लगाकर यह प्रसाद घर में बांटा गया।और इस दिन के बाद से ही समाज के लोग पर्वों की शुरुआत होने का आधार मानते हैं।और माता महालक्ष्मी जी के आर्शीवाद द्वारा ही अपने जीवन में धन,सम्पदा,सुख, शांति का वर प्राप्त करते हैं।

महालक्ष्मी माता जी की कथा में समाज के उपस्थित भक्तों को कथावाचक कमला भगत ने यह बताया गया कि उज्जैन के न्यायकारी मांगलिक राजा शिकार करते करने जंगल में गये। तो गोपियाँ कथा कर रही थी तो उन्होंने राजा को भी सगड़ा (रक्षासूत्र) बाँधा।और विधि बताई कि इस रक्षासूत्र (सगड़े) को हल्दी में डुबाकर चांवल का स्पर्श करवाकर 16 गठान बांधकर सोलह दिन के बाद इस रक्षासूत्र को उतारकर कथा सुनने को कहा।परंतु राजा महल में जाकर रानी को यह रक्षासूत्र देकर इसका उपयोग बताकर दरबार में चला जाता है।और रानी अपने अभिमान के कारण इसे फेंक देती है।

जिससे रानी का जीवन कष्टमय हो जाता है।और एक दिन राजा रानी में विवाद होता है।और राजा कहता है जो गलत होगा उसे राज्य छोड़ना होगा। तो इस कारण रानी राज्य छोड़कर भटकते भटकते कुम्हार के घर जाती है तो वहां भी उसे भोजन हेतु बर्तन नहीं मिलते,नदी में पानी पीने जाती है तो नदी सूख जाती है। बाग़ में फल खाने जाती है तो बाग़ सूख जाते हैं। फिर वह एक जोगी के निवास पर जाती है जो एक दिन ली हुई भिक्षा से वर्ष भर भोजन करता है। रानी की सूरत देखने से उस जोगी को भी भिक्षा नही मिलती। फिर वह साल भर जोगी के यहाँ रहकर उसकी सेवा करती है।और महालक्ष्मी का व्रत रखकर रक्षासूत्र बांधती है।तो माता महालक्ष्मी उस पर कृपा करती है। और उसके स्पर्श से वीरान हुई चीजों को हरा भरा कर देती है। फिर राजा शिकार करते हुए संयोगवश जोगी के यहाँ पहुँचता है। जहाँ उसे फिर रानी भी मिल जाती है।

कथा के समापन पर आदर्श सिंध ब्रादर मंडल एवं साईं झूलेलाल धाम महिला मंडली के उपस्थित श्रद्धालुओं को समाज के अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र कृष्णानी एवं महिला मंडल अध्यक्ष लक्ष्मी नागदेव ने इस पर्व की शुभकामनाएं प्रेषित कर माता महालक्ष्मी से सभी की मनोकामना पूर्ण होने का मांगा। इस अवसर पर वैश्विक आरोग्य और वैश्विक कल्याण की प्रार्थना भी माता महालक्ष्मी से की गई।

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