दुर्ग। जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में जीवन की जंग लड़ रहे 700 ग्राम और 1 किलो वज़न के दो नवजात शिशुओं का सफल उपचार किया गया। दोनों शिशु समय से पूर्व जन्मे थे और गंभीर हालत में भर्ती हुए थे। जन्म के बाद दोनों बच्चों को सांस लेने में कठिनाई होने के कारण सर्फैक्टेंट थेरेपी दी गई तथा वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। उपचार के दौरान ब्लड प्रोडक्ट्स चढ़ाए गए और समय-समय पर सभी आवश्यक जांचें की गईं।
दोनों बच्चों की आंखों में समयपूर्व जन्म से जुड़ी बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) की पहचान की गई, जिसके लिए अस्पताल में ही लेज़र ट्रीटमेंट किया गया। विशेषज्ञ टीम और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत, आधुनिक उपकरणों और माता-पिता के सहयोग से दोनों शिशु अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।
लगभग दो महीने तक SNCU में निरंतर निगरानी और उपचार के बाद, अब दोनों नवजात अपने घर जा रहे हैं। यह उपलब्धि जिला अस्पताल की SNCU टीम की दक्षता और समर्पण का प्रमाण है, जो नन्हीं जानों के जीवन को बचाने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।इन चिकित्सकों और स्टाफ की रही महत्त्वपूर्ण भूमिका इस सफल उपचार में डॉ. आर.के. मल्होत्रा (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. वाई. किरण कुमार (एस.एन.सी.यू. प्रभारी एवं शिशु रोग विशेषज्ञ), डॉ. आशीष (एस.एन.सी.यू. मेडिकल ऑफिसर),अनीता वर्मा (सिस्टर इंचार्ज, एस.एन.सी.यू.) तथा समस्त नर्सिंग स्टाफ और वार्ड आया का विशेष योगदान रहा। इनकी मेहनत, समर्पण और टीम वर्क के कारण समय से पहले जन्मे इन शिशुओं को नया जीवन मिल सका।




