“तकनीकी कौशल का पूरा लाभ उठाने को नीतिगत बदलाव अब समय की मांग”
डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन ऑफ़ इस्पात (DEFI) के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में दिल्ली प्रवास किया। इस दौरान केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से लेकर सेल कॉर्पोरेट के उच्च अधिकारियों तक के साथ महत्वपूर्ण चर्चाओं का दौर चला।
प्रतिनिधिमंडल से लौटे डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन ऑफ़ इस्पात के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि आगामी 3 से 4 वर्षों में जब बड़ी संख्या में रिटायरमेंट होने वाले हैं, उस स्थिति में कंपनी की आवश्यकताओं को पूरा करने में डिप्लोमा इंजीनियर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए आवश्यक है कि आज से ही उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों हेतु तैयार किया जाए, पॉलिसीज़ में बदलाव लाए जाएँ, और उनके करियर ग्रोथ पर गंभीरतापूर्वक विचार कर विश्वास उत्पन्न किया जाए।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि 1990-92 के आसपास S6 ग्रेड से करियर प्रारंभ करने वाले अधिकांश डिप्लोमा इंजीनियर्स आज भी S11 ग्रेड में अटके हुए हैं और न्यूनतम करियर ग्रोथ से भी वंचित हैं। यही स्थिति हाल ही के वर्षों में S3 से करियर प्रारंभ करने वाले इंजीनियर्स के लिए भी गलत संदेश दे रही है, जो नए डिप्लोमा इंजीनियर्स को निरुत्साहित करने वाली है।

देश की अन्य समकक्ष संस्थाओं में कार्यरत साथियों की तुलना में ग्रोथ में “जमीन-आसमान का अंतर” होने पर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।
इसी संदर्भ में DEFΙ प्रतिनिधिमंडल ने उच्च अधिकारियों के समक्ष निम्न मांगें रखीं:
- जेओ (Junior Officer) पदों की संख्या बढ़ाई जाए।
- नॉन वर्क्स में मिलने वाले सेक्शन ऑफिसर पदनाम कि तर्ज पर वर्क्स एरिया में भी सेक्शन इंजीनियर पदनाम किया जाए। ताकि वरिष्ठ कर्मी ससम्मान सेवानिवृत्त हो सके।
- पॉलिसी में परिवर्तन कर यंग एज में ही डिप्लोमा इंजीनियर्स को जेओ बनने का अवसर दिया जाए ताकि कंपनियों को उनकी शारीरिक क्षमता और तकनीकी कौशल का पूरा लाभ मिल सके।
- जेओ परीक्षा हर वर्ष आयोजित की जाए (वर्तमान में दो वर्ष या उससे भी ज्यादा समय में होती है)।
- MTT परीक्षा पुराने पैटर्न पर आयोजित की जाए, लेकिन उसमें सुधार करते हुए अनुभवी और डिग्री प्राप्त डिप्लोमा इंजीनियर्स को लिखित परीक्षा में अतिरिक्त वेटेज दिया जाए।
- वे वरिष्ठ डिप्लोमा इंजीनियर्स, जो लंबे समय से एक ही ग्रेड में रुके हुए हैं और जेओ प्रमोशन से वंचित रह गए हैं, उन्हें अतिरिक्त इंक्रीमेंट देकर प्रोत्साहित किया जाए।
- लेटरल एंट्री जैसे हाइड्रोलिक, बॉयलर ऑपरेशनल इंजीनियर्स व सेफ्टी ऑफिसर के लिए विभागीय कैंडिडेट को वरीयता या निर्धारित सीट रखी जाए।
- डेफि पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि आज से ही उपयुक्त पॉलिसी बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में आधुनिकीकरण एवं मॉडर्नाइजेशन की दिशा में कंपनी को तकनीकी कौशल का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए डेफि डिप्लोमा इंजीनियर्स की आवाज़ बनकर उनके हक़ और उज्जवल भविष्य के लिए सतत प्रयासरत रहेगा।




