दुर्ग। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में 53वीं राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी के अंतर्गत ‘पॉलिथीन के उपयोग में कमी और उसके वैज्ञानिक विकल्प’ विषय पर केंद्रित एक प्रभावशाली सेमिनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के प्रति बाल वैज्ञानिकों की संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रेरक उदाहरण बना। इस सेमिनार में दुर्ग, रायपुर, डोंगरगढ़, जगदलपुर, जयपुर, झगराखंड, किरंदुल, बिलासपुर, रायगढ़ सहित 33 केंद्रीय विद्यालयों के बाल वैज्ञानिकों ने अपने शोध आधारित प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने वैश्विक शोध, भारतीय उदाहरण और स्थानीय प्रयोगों के माध्यम से पॉलिथीन समस्या और उसके विकल्पों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने की तथा संयोजन डॉ. अजय आर्य द्वारा किया गया। निर्णायक मंडल में गुरमीत सिंह, अंकित साहू, डॉ. अनिल कुमार और विवेक अग्रवाल शामिल रहे। बच्चों को संबोधित करते हुए गुरमीत सिंह ने कहा – वर्तमान समय में शिक्षा वही है जो व्यक्ति को नए ढंग से सोचना, सीखना और समस्याओं का समाधान करना सिखाए।

प्राचार्य उमाशंकर मिश्रा ने कहा कि वैज्ञानिक समस्याएं समाधान प्रबंधन सबका अपना महत्व है किंतु हम अपने निजी जीवन में पॉलिथीन के उपयोग को खत्म करने या काम करने की दिशा में तत्काल प्रयत्न कर सकते हैं। इसके लिए सब्जी खरीदते समय थैला लेकर जाने की आदत डाली जा सकती है। पॉलिथीन के थैलों का स्वयं बार-बार उपयोग करना भी इस दिशा में प्रभावी सिद्ध हो सकता है।दो दिवसीय इस वैज्ञानिक प्रदर्शनी में कुल 21 निर्णायक विभिन्न 7 थीम पर मूल्यांकन के लिए उपस्थित रहे। निर्णायकों में डॉ. मोनिका श्रीवास्तव, गुरमीत सिंह अहीर, राजेश्वर कुमार देवांगन, डॉ. अजय कुमार वर्मा, विक्की कुमार, विवेक अग्रवाल, डॉ. ज्योति बक्शी, डॉ. मीनाक्षी भारद्वाज, मृणालिनी सोनी, डॉ. सिंफी रल्हन, डॉ. दिल्लीर कुमार, रक्षा रानी अग्रवाल, मुकेश वासनिक, भानुप्रिया, सुरभि श्रीवास्तव, डॉ. अनिल कुमार सुमन, डॉ. रेशमा लोकेश, डॉ. यासमीन फातिमा परवेज, डॉ. संजू सिंह, डॉ. श्रीराम कुंजन और अंकित साहू प्रमुख रहे।
समापन समारोह में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। झगराखंड के शिक्षक अशोक कुमार ने कहा – नई-नई प्रस्तुतियों को देखकर हर बार सोचने का नया नजरिया मिलता है। बिलासपुर की शिक्षिका नीलम ने विचार साझा करते हुए कहा – यदि दो लोगों के पास एक-एक एप्पल हो और वे उन्हें अलग-अलग रखें तो दोनों के पास केवल एक-एक एप्पल ही रहता है। लेकिन विचारों की दुनिया अलग है – जब आप अपना आइडिया किसी अन्य व्यक्ति से साझा करते हैं और वह भी अपना विचार आपके साथ साझा करता है, तो दोनों के पास दो नए विचार हो जाते हैं। यही वैज्ञानिक प्रदर्शनी की वास्तविक शक्ति है। डोंगरगढ़ की छात्रा सुजल ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि दुर्ग विद्यालय के शिक्षकों और प्राचार्य द्वारा मिला सहयोग अविस्मरणीय रहा। जयपुर की वैष्णवी ने कहा – नजरिया बदलने से दुनिया बदल जाती है, इसलिए हमें हमेशा नए ढंग से सोचने की आदत विकसित करनी चाहिए।
अंत में प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने सभी निर्णायकों, शिक्षकों और छात्रों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से यह आयोजन सफल रहा।
उल्लेखनीय है कि कल बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय विद्यालय रायपुर संभाग की सर्वोच्च अधिकारी पी बीएस उषा ने किया। कार्यक्रम में 179 विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न विद्यालयों के 39 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक और प्रभारी एसके राय थे। विद्यालय का विज्ञान विभाग एसके चतुर्वेदी, शीला चाको, गीता माली राजेश कुमार के साथ मुख्य भूमिका में रहा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अजय आर्य ने कहा – हालात कैसे भी हों बहादुर रोया नहीं करते, सीने में जिसके जुनून हो वह हिम्मत खोया नहीं करते। यह वैज्ञानिक प्रदर्शनी न केवल पॉलिथीन मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करती है, बल्कि आने वाले कल के वैज्ञानिकों की नई सोच को भी दिशा देती है।