भिलाई: नगर पालिक निगम भिलाई के जोन-04 में सीसीटीवी कैमरा लगाने के नाम पर हुए लाखों रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला अब जिला कलेक्टर तक पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि जसप्रीत सिंह ने सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई कि निगम प्रशासन न केवल कैमरों की खरीद में हुए घोटाले को दबा रहा है, बल्कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं दे रहा है।
आरटीआई में जानकारी छिपाने का आरोप:
जसप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के माध्यम से निगम से पूछा था कि जोन-04 के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए कुल कैमरों में से वर्तमान में कितने चालू स्थिति में हैं। हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों ने इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जानकारी छिपाने का मुख्य कारण यह है कि अधिकांश कैमरे या तो बंद पड़े हैं या केवल कागजों पर ही स्थापित दिखाए गए हैं। क्योंकि जब से कैमरे लगे हैं एक ही बार चालू हुआ है उसके बाद कोई भी क्राइम हुआ है तो पुलिस जांच करने जब भी चाहती है तो कैमरे बंद मिले हैं।
बंद कैमरों से सुरक्षा पर सवाल:
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि श्रीराम चौक जैसे संवेदनशील इलाकों में कई बार अपराध होने पर जब पुलिस जांच के लिए पहुंची, तो वहां लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। शिकायतकर्ता ने पहले भी कई बार कैमरे चालू कराने के लिए निगम में शिकायत की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
घोटाले के प्रमुख तथ्य:
अत्यधिक दरें: आरटीआई से प्राप्त अन्य दस्तावेजों (प्रकरण क्र. 361) के अनुसार, जो PTZ कैमरा बाजार में ₹15,000 से ₹25,000 में उपलब्ध है, उसे निगम ने ₹2,96,997 की 6 दर से खरीदा है।
अन्य सामग्री: ₹4,500 के बुलेट कैमरे के लिए ₹11,013 और करीब ₹18,000 के टीवी के लिए ₹45,500 का भुगतान किया गया है। टीवी भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा
स्वतंत्र जांच की मांग: जसप्रीत सिंग ने शिकायत में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच भिलाई निगम के अधिकारियों से न कराकर कलेक्टोरेट की स्वतंत्र टीम या लोक निर्माण विभाग (PWD) की तकनीकी विंग से कराई जाए।
जसप्रीत सिंह ने कलेक्टर से मांग की है कि आरटीआई में जानकारी छिपाने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाए और बाजार मूल्य से अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली दोषियों की संपत्ति से की जाए।




