यहां प्रार्थना करने से मनचाहा जीवनसाथी और परीक्षा में मिलती है सफलता
आनंद शर्मा भिलाई। दुर्ग जिले के एक गांव में एक ऐसा मंदिर भी है जो करीब 1 हजार साल पुराना है। इस मंदिर में भगवान गणेश अपने पिता के साथ विराजे हैं। यह मंदिर बहुत ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है,लेकिन भक्तों में बड़ी आस्ता है।आसपास से लोग यहां दर्शन करने आते हैं। भक्तों में आस्ता है कि यहां पूजा अर्चना करने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है और परीक्षा में सफलता मिलती है।
दुर्ग जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर दुर्ग से खैरागढ़ रोड में एक गांव है नगपुरा। जहां तालाब के बाए किनारे पर यह मंदिर सदियों से स्थापित हैं। जब हम यहां पहुंचे तो गांव वालों ने हमें रास्ता बताया। हम मंदिर के समीप पहुंचे। हमने देखा कि यह मंदिर भगवान शिव और गणपति को समर्पित है। मंदिर का मुख पूर्व दिशा की ओर है। मंदिर के गर्भगृह में शिव लिंग है और मंदिर के पीछे बाह्य भित्ति पर गणेश की प्रतिमा है। इसके अलावा यहां अन्य प्रतिमाएं भी है। वरिष्ठ पुरात्तववेता केपी वर्मा ने बताया कि यह मंदिर करीब 12वीं शताब्दी में बनाई गई थी। संभवत:इसे रायपुर के कलचुरि राजाओं ने अपने राज में बनवाया हाेगा।
भोरम देव मंदिर की तरह दिखता है
यह मंदिर कवर्धा में स्थित भोरम देव मंदिर की तरह दिखता है। गांव वाले भी यही कहते हैं। क्योंकि इस मंदिर के चौखट पर भोरम देव की तरह छोटे-छोटे करीब 10 मिथून प्रतिमाएं उकेरी गई है। वरिष्ठ पुरात्तववेता केपी वर्मा ने बताया कि दिखने में हालाकि एक जैसे दिखते हैं, लेकिन दोनों मंदिर में काफी अंतर है। भोरमदेव 11 वीं शताब्दी का है जबकि नगपुरा का मंदिर 12वीं शताब्दी का है।
गांव वाले करते हैं देखरेख और पूजापाठ
यह मंदिर पुरात्व विभाग के जानकारी में है,लेकिन इसके देख-रेख व सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। मंदिर धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। मंदिर का पूरा देख रेख और पूजा अर्चना गांव वाले ही करते हैं।यहां गांव वालों की बड़ी आस्था जूड़ी है। उनके पूर्वज यहां पीढ़ियों से पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। गांव में कोई भी शुभ काम की शुरूआत यहां पूजा अर्चना से की जाती है।





