Thursday, March 5, 2026

सीड ड्रील तकनीक और कतार बोनी से कम पानी में सोयाबीन व सरसों की उन्नत खेती… लखपति बने रहे किसान..पढ़िए खास खबर

Bhilai। रबि फसल में धान की अपेक्षा दलहन तिहलन की खेती बन रहा उपयोगी, धान के लिए 150 सेमी पानी की जरुरत, सरसो के लिए सिर्फ 40 सेमी व सोयाबनी के लिए 50 सेमी पानी की जरुरत
पुराने पद्धति से पहले सोयाबीन की प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल होती थी पैदावारी, अब नई तकनीक से 18 से 19 क्विंटल हो रही

धान की फसल में पानी की आवश्यकता और सिंचाई का महत्व

राजनांदगांव। आधुनिक दौर में खेती करने के नए-नए तरीके निजात किए जा रहे हैं। नई तकनीक से हो रही खेती से बोनी किए फसलों की पैदावारी बढ़ रही है और किसान समृद्ध हो रहे है। वहीं जल संकट के बीच कम पानी व कम लागत में जिले के किसान अब खेती के पुराने पद्धति को छोड़ नए आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। पहले के दौर में किसान धान की पैदावारी करने में अधिक विश्वास रखते थे। अब दौर बदल रहा है और किसान दलहन तिलहन के अलावा सोयाबीन व सरसों की आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं।
जिले के किसान सीड ड्रील तकनीक से सोयाबीन व सरसों की उन्नत खेती कर लखपति बन रहे हैं। पुराने पद्धति से किसान सोयाबीन का खेती कर प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल की पैदावारी करते थे। अब नए तकनीक सीड ड्रील से कतार बोनी कर प्रति हेक्टेयर 18 से 19 क्विंटल पैदावारी कर उतने ही लागत में अधिक कमाई कर रहे हैं।
नई तकनीक सीट ड्रील पद्धति से सोयाबीन की खेती कर रहे राजनांदगांव ब्लाक के मासूल गांव निवासी किसान कमलेश वर्मा ने बताया कि वह 20 वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। उन्होने बताया कि वह रबी सीजन में धान, चना, सोयाबीन और गेंहू की पुराने पद्धति से खेती करते आ रहे थे। इस साल उसने नई तकनीक सीड ट्रील से कतार बोनी कर सोयाबीन की पैदावारी किए थे।

धान की खेती में जल प्रबंधन की सावधानियाँ और विकल्प

धान के लिए 150 सेमी पानी व सोयाबीन के लिए सिर्फ 50 सेमी की जरुरत
रबी सीजन हो या खरीफ धान की खेती करने के लिए 140 से 150 सेमी मीटर पानी की जरुरत पड़ती है। खरीफ सीजन में बारिश के जल से किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल जाता है। वहीं रबी सीजन में गर्मी के दौर में पानी की विकराल समस्या सामने आ रही है। भूजल स्तर के काफी नीचे जाने से बोर सूखने के कगार पर पहुंच जाते है। वहीं जलाशय, नदी व तालाब सूख जाते है। ऐसे में धान की बोनी करने पर पानी की कमी होती है। गर्मी के दिन में कम पानी में सोयाबीन व सरसों धान के विकल्प के रुप में सामने आ रहा है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सोयाबीन के लिए अधिकतम 50 सेमी और सरसो के लिए 40 सेमी पानी की जरुरत पड़ती है। जबकि धान के लिए 140 से 150 सेमी पानी की जरुरत पडडती है।

धान की सिंचाई में समय और विधि का सही चुनाव जरूरी

सोयाबीन में प्रति हेक्टेयर 36 हजार 600 रुपए की कमाई
किसान कमलेश वर्मा ने बताया कि सीड ड्रील पद्धति से उसने सोयाबीन के बीज को 6 से 7 लाइन के कतार में बोनी किया। इस विधि से प्रति पौधे 125 से 140 फलियां निकली और प्रति हेक्टेयर 18 से 19 क्विंटल की पैदावारी हुई।
किसान कमलेश वर्मा ने बताया कि इससे पहले वह पुराने पद्धति से सोयाबीन की पैदावारी करते थे तो प्रति पौधे फलियां की संख्या आसतन 50 से 60 रहती थी और हेक्टेयर में प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल की ही पैदावारी होती थी।
उन्होंने बताया कि सोयाबीन की खेती में पुराने पद्धति में उसे प्रति हेक्टेयर लगभग 8400 रुपए की लागत आती थी। वहीं नई पद्धति में कतार बोनी में भी लागत उतनी ही आई है। किसान कमलेश वर्मा ने बताया कि इस साल उसने 4 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोनी किया था और प्रति हेक्टेयर उसे 36 हजार 600 रुपए की कमाई हुई है।

खेतों में अधिक पानी भरना उत्पादन पर डालता है उल्टा प्रभाव

आधुनिक पद्धति से सरसों की खेती कर समृद्धि की ओर बढ़ रहे किसान
वहीं आधुनिक कतार बोनी से सरसो की खेती कर किसान समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहे हैं। सरसों की आधुनिक खेती करने वाले राजनांदगांव ब्लाक के जंगलेशर के किसान प्रसन्न कुमार सागरमल ने बताया कि वह धान, गेंहू, चना व सरसों की खेती करते आ रहा है। इस साल उसने रबी सीजन में सीड ट्रील तकनीक से कतार बोनी के तहत 3 हेक्टेयर में सरसों की खेती किया। उन्होंने बताया कि नए तकनीक से उसने प्रति हेक्टेयर 7 से 8 क्विंटल सरसों की पैदावारी कर अधिक मुनाफा कमाया है। किसान ने बताया कि 3 हेक्टेयर में उसे लागत 30 हजार की आई है और सरसों की इस फसल से उसे करीब डेढ़ लाख की आमदनी हुई है। किसानों की इस सफलता को देखकर गांव सहित आसपास के किसान भी खेती की नई तकनीक सीखने इन लोगों के पास पहुंच रहे हैं।

वैज्ञानिक तकनीकों से जल की बचत और उत्पादन में सुधार संभव

कम पानी में होती है खेती, इस दौर में बेहतर
वर्तमान समय में पानी की विकराल समस्या सामने आ रही है। रबि सीजन में किसानों को दलहन तिलहन के अलावा सोयाबीन व सरसों की आधुनिक खेती करने प्रोत्साहित किया जा रहा है।जिले के किसान आधुनिक सीड ट्रील पद्धति से सोयाबीन व सरसों की कतार बोनी कर अधिक पैदावारी कर उन्नत बन रहे है। धान के लिए 150 सेमी व सोयाबीन के लिए सिर्फ 50 सेमी पानी की जरुरत पड़ती है।

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