सियान सदन में आध्यात्मिक उद्बोधन

*जो सयाना है, वही सियान है : आचार्य डॉ. अजय आर्य*

“सुमन बनो, दुश्मन नहीं” : आचार्य

भिलाई नगर। नेहरू नगर स्थित सियान सदन एवं आर्य समाज मंदिर सेक्टर-6 के संयुक्त तत्वावधान में महामृत्युंजय महायज्ञ एवं सत्संग का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर धर्म, संस्कृति और आस्था के इस पर्व को सार्थक बनाया।कार्यक्रम की शुरुआत में सियान सदन के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया। आचार्य अंकित शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न कराया। भक्ति रस से सराबोर स्वाति पेंढारकर ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं प्रवीण गुप्ता ने भावपूर्ण स्वर में ‘सुख भी मुझे प्यारा है, दुख भी मुझे प्यारा है’ भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।*वृद्धावस्था : अनुभव, वृद्धि और सम्मान की निशानी*मुख्य वक्ता आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने प्रेरक व्याख्यान में कहा कि वृद्धावस्था कमजोरी नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा – उन्होंने शास्त्रवचन उद्धृत करते हुए कहा- ‘वह सभा, सभा नहीं है, जहां वृद्ध न हों। वह वृद्ध, वृद्ध नहीं है जो धर्म न बोले। और वह धर्म, धर्म नहीं है जिसमें सत्य न हो।’ जीवन को फूलों की तरह बनाने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा – ‘संस्कृत में फूल को ‘सुमन’ कहा गया है। अगर मन अच्छा है तो जीवन सुगंधित होगा। इसलिए जीवन को सुमन बनाइए, दुश्मन मत बनाइए।’ उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा- सबसे समृद्ध अवस्था वृद्धावस्था ही है। सिर में चांदी, दांतों में सोना, आंखों में मोती, खून में शुगर और किडनी में कीमती पत्थर, यह सब बुजुर्गों की संपदा है। उनके बाल धूप से नहीं बल्कि जीवन की तपस्या से सफेद होते हैं।

अनुभवी होना ही वृद्धि होना है।’ नारद भक्ति सूत्र और गणपति के बड़े कानों का उल्लेख करते हुए आचार्य ने कहा कि अधिक सुनना ही सच्चे ज्ञान का मार्ग है। हास्य प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा – एक बार पत्नी ने अदालत में तलाक की अर्जी थी और कहा कि पति मानसिक प्रताड़ना देते हैं, क्योंकि झगड़े के समय उनको जितनी बातें कहनी होती है वह कह देते हैं और बाद में जब मेरी बारी आती है अपने कान की मशीन उतारकर रख देते हैं। वास्तव में न सुनना ही सबसे बड़ी प्रताड़ना है। जिस दिन हम सुनना सीख जाएंगे, जीवन की आधी समस्याएँ स्वतः समाप्त हो जाएंगी।’ *बच्चों को सिखाएं झुकना*उन्होंने कहा कि सियान सदन में आज जितने बुजुर्ग हैं अभी दादा-दादी होंगे नाना नानी होंगे अपने नाती पोते के साथ खेलते होंगे। जब भी बच्चों को संस्कार दें झुकना सिखाएं जो दादा-दादी माता-पिता और गुरु के सामने झुकता है उसका जीवन ऊपर उठना है। आज की जो पीढ़ी है वह कहती है कि सर कटा सकता हूं लेकिन सर झुका सकता नहीं।

जिस संदर्भ में यह बात कही गई है वह ठीक है लेकिन जीवन को सरल और विनम्र बनाना चाहिए इसीलिए विद्या का पहला गुण विनम्रता लिखा गया है। बच्चों को माफ करना और माफी मांगना दो चीज जरूर सिखाइए। इसके बिना जीवन बोझ बन जाता है। किसी शायर ने कहा है मैंने कुछ इस तरह अपनी जिंदगी आसान कर ली ।किसी को माफ कर दिया किसी से माफी मांग ली।आयोजन में प्रदीप गुप्ता, प्रवीण गुप्ता, मधु गुप्ता, अशोक गुप्ता, हेमंत चौहान, आभा गुप्ता, पुष्पा सिंह, आरसी सिंह, एसके मिश्रा, अनु मिश्रा, पद्मा, सुरेश, प्रिया चौहान, मंजू अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, शशि अग्रवाल, एम.डी. अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक जाप किया।यह आयोजन धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण संदेश दे गया कि “वृद्धजन समाज की थाती हैं, उनका सम्मान और उनसे सीखना ही सच्चा धर्म और सच्ची भक्ति है।”

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