स्थान: जयंती स्टेडियम, भिलाई, छत्तीसगढ़
कथा का दूसरा दिन – सावन मास
कथा वाचक: पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले)
आयोजक: बोल बम सेवा समिति, भिलाई
समर्पित सेवाभाव: समिति अध्यक्ष दया सिंह
सावन के इस पावन महीने में भिलाई के जयंती स्टेडियम में चल रही ” शिव महापुराण कथा” का दूसरा दिन भी भक्ति और सत्संग की गहराई में डूबा रहा। पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने इस दिन शिव भक्ति, संयम और परिवार की महत्ता पर अद्भुत संदेश दिए, जो जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
कथा के प्रचार-प्रसार का उद्देश्य – दया सिंह की सोच
बोल बम सेवा समिति के अध्यक्ष दया सिंह ने कहा कि
“हम कथा से पहले प्रचार-प्रसार करते हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इस अमृतमयी कथा को सुनने आएं। जो भक्त ‘शिवाय नमस्तुभ्यं’ का उच्चारण करते हैं, उनकी उपस्थिति से जजमान को पुण्य फल प्राप्त होता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कथा सिर्फ आयोजन नहीं, समाज को जोड़ने और आत्मा को जाग्रत करने का माध्यम है।
पंडित प्रदीप मिश्रा के अमूल्य उपदेश – जीवन को बदल देने वाली सीख
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा में सरल उदाहरण देकर गहरी बातें कही। उन्होंने समझाया कि –
“बबूल का पेड़ लगाकर कोई आम के फूल की उम्मीद नहीं कर सकता।”
यानी, अगर मन, वचन और कर्म से हम कटुता, निंदा, द्वेष फैलाएंगे तो जीवन में सुख, शांति और भगवान की कृपा की अपेक्षा व्यर्थ है।
दूसरों की निंदा और शिव कृपा
उन्होंने सख्त शब्दों में कहा —
“जो दूसरों की चारी और निंदा करते हैं, उन्हें शिव की कृपा कभी नहीं मिलती। ऐसे लोगों के जीवन में न तो शांति आती है, न भक्ति टिकती है।”
मंदिर और पूजा की योग्यता – आत्ममंथन का विषय
पंडित प्रदीप मिश्रा ने यह भी बताया कि
“जो व्यक्ति शिव मंदिर में नहीं जा सकते, माँ दुर्गा की पूजा नहीं कर सकते, उन्हें पहले अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेना चाहिए।”
क्योंकि —
“माता-पिता की सेवा और उनके आशीर्वाद से ही शिव कृपा का द्वार खुलता है।”
उन्होंने बताया कि भगवान शिव सरल हैं, परंतु कपट, अहंकार और द्वेष को कभी स्वीकार नहीं करते।
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और भक्तिभाव दूसरे दिन भी हजारों श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। स्टेडियम भक्ति के रंग में रंगा रहा और “हर हर महादेव” के जयघोष से आसमान गूंजता रहा।
