महतारी भाखा के सम्मान के लिए सैंकड़ों छत्तीसगढ़ी हुए भिलाई मे इकट्ठा

भिलाई मे छत्तीसगढ़ी भाखा को कामकाज और पढ़ाई लिखाई के भाषा बनाने मुहिम का आगाज

  • सभा में डिग्रीधारी छत्तीसगढ़ीया के लिए सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता का लिया निर्णय
  • जब एम ए की डिग्री छत्तीसगढ़ी में तो प्राइमरी में छत्तीसगढ़ी क्यों नहीं: प्रो. सुधीर शर्मा
  • स्थानीय और लोक भाषा का विकास समाज के अंतिम व्यक्ति के न्याय के लिए जरूरी: सत्यजीत साहू

छत्तीसगढ़ी समाज के द्वारा सिविक सेंटर स्थित प्रगति भवन में गुनान गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें छत्तीसगढ़ के ख्याति प्राप्त साहित्यकारो और प्रखर बुद्धिजीवियों ने अपनी बातें रखी कार्यक्रम दीप प्रज्वलित कर आरंभ किया गया छत्तीसगढ़ी समाज के जिला अध्यक्ष मनोज साहू ने संस्था के इतिहास पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नरेंद्र कुमार बंछोर ने सभा को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बचाने के लिए शिक्षा को माध्यम बनाना होगा, हमें उन लोगों को सहयोग करना है जिनकी भावना छत्तीसगढ़ी के लिए अच्छी हो। उन्होंने सभी वक्ताओं की खूब सराहना की कार्यक्रम के आयोजकों को इस आयोजन की बधाई दी।

प्रमुख वरिष्ठ साहित्यकार दुर्गा प्रसाद पारकर ने सभा में अपनी बात रखते हुए कहा कि जन्म प्रमाण पत्र और जनगणना पत्रक में अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी दर्ज होना चाहिए उन्होंने आधारभूत त्रुटियों से अवगत कराया, भाषा को रोजगार से भी जोड़ना होगा।वरिष्ठ कलाकार व साहित्यकार पीसी लाल यादव ने छत्तीसगढ़ीया सबले बढ़िया नारे को शोषक वर्ग का नारा की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि मातृभाषा की उपयोगिता से मस्तिष्क का विकास होता है।उन्होंने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा कि आज छत्तीसगढ़ में संस्कृति में दिखावा नहीं होना चाहिए हमें आप अंदर झांकने की जरूरत है।

कल्याण महाविद्यालय के प्रोफेसर सुधीर शर्मा ने कहा कि राज्य निर्माण का श्रेय भले ही राजनितिज्ञों ने ले लिया लेकिन वास्तविकता यह है कि छत्तीसगढ़ीया कलाकार और साहित्यकार नहीं होते तो हमें यह छत्तीसगढ़ नहीं मिलता उन्होंने दाऊ श्री रामचंद देशमुख की संस्था चंदैनी गोंदा को रेखांकित किया उन्होंने आगे कहा कि जब हम साहित्यिक रूप से खोखले हो जाएंगे तो बिना बोले लोग अपनी मातृभाषा के लिए लड़ने आएंगे, तय है कि आज नहीं तो कल सरकार को इसे पाठयक्रम का हिस्सा बनाना पड़ेगा।छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व सचिव अनिल भतपहरी ने कामकाज और पाठयक्रम में शामिल करने को लेकर अपना अनुभव साझा किया छत्तीसगढ़ीया राज लाने के लिए भाखा छत्तीसगढ़ी के लिए एक मानक कैसे तैयार हो इस पर गंभीरता पूर्वक ठोस बातें रखी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सत्यजीत साहू ने संगठन के दायित्व और आवश्यक कदम के बारे में जानकारी दी उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई किसी भाषा से नहीं है लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं का संवर्धन और संरक्षण हर हाल में आवश्यक है ताकि यहां कि लोक संस्कृति, परंपरा को जीवंत रहे तथा अंतिम व्यक्ती को प्रत्येक क्षेत्र में न्याय मिल सके।इस दौरान ‘कृष्ण कन्हैया’ शानू बंजारे कृत छत्तीसगढ़ी मुहावरा और लोकोक्ति से संबंधित गांव के गोठ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया।

यह मह्त्वपूर्ण निर्णय पारित

  • सभा में प्रमुख 8 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें छत्तीसगढ़ियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता।
  • न्यायालय बैंक सहित राज्य के सभी महत्वपूर्ण विभाग में छत्तीसगढ़ी अनुवादक रखे जाने का निर्णय लिया गया।
  • आम जनता से निवेदन किया गया कि सरकारी कामकाज छत्तीसगढ़ी में आवेदन लिखा जाए और कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई भी छत्तीसगढ़ी में लगाया जाए।
  • चिकित्सा एवं तकनीकी महाविद्यालय संस्थानों में छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम और शिक्षक रखे जाएं।
  • मीडिया में छत्तीसगढ़ी शब्दकोश में एकरूपता हिंदी के अपभ्रंश का प्रयोग ना किया जाए।
  • सभी विभागों में छत्तीसगढ़ी राजभाषा अधिकारी की नियुक्ति किए जाने की मांग हुई।
  • जनगणना में मातृभाषा छत्तीसगढ़ी लिखा जाए योजना बनाने प्रस्ताव पारित हुआ।
  • छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के लिए सम्मानजनक बजट 5 करोड़ प्रस्तावित किए जाने का निर्णय लिया गया।

ये सब रहे उपस्थित
इस दौरान प्रमुख रूप से रायपुर आश्रम प्रमुख ऋतेश्वरानंदजी, मालती परगनीहा,कलाकार रजनी रजक, राजेन्द्र परगनिहा, यशवंत वर्मा, संजय देशमुख, पारस नाथ , चंद्रशेखर चंद्राकर, मनहरन टिकरिहा, राजेन्द्र रजक, डिकेन्द्र हिरवानी, नोहर सिंह गजेंद्र, राकेश हिरवानी, डी पी देशमुख, पुष्पक राज देशमुख, घनश्याम ग़जपाल, ढालेश साहू ,कामेश् साहू, विकास हिरवानी, संदीप चौहान, संजय जंघेल, बलराम चंद्राकर,कवि गजराज, गुलाब दास मानिकपुरी, दीनबंधु साहू, पेनुक नेताम, कृष्णा, बबलू, सहित कई गणमान्य नागरिकों की गुणवत्ता पूर्ण उपस्थित रही. कार्यक्रम का संचालन केशव साहू ने किया।

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