डिप्लोमा इंजीनियरों ने की सीजीएम (एम एंड यू) बेहरा से सार्थक भेंटवार्ता।

कैरियर विकास, पदोन्नति, ठेका श्रमिक, टीम बिल्डिंग और उत्पादन बढ़ाने पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

डिप्लोमा इंजीनियरों के प्रतिनिधिमंडल ने सीजीएम इंचार्ज (एम एंड यू) बेहरा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर सीजीएम शॉप्स श्री सचदेव भी उपस्थित थे। पदनाम, कैरियर विकास, पदोन्नति सहित डिप्लोमा इंजीनियरों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी प्रमुख लक्ष्यों से अवगत कराते हुए कहा कि—

वरिष्ठ डिप्लोमा इंजीनियरों को जूनियर की जगह सेक्शन ऑफिसर की तर्ज पे सेक्शन इंजीनियर का पदनाम प्रदान किया जाए।

ई-0 परीक्षा में पात्रता के मानदंड को सरल बनाया जाए और अन्य पीएसयू की तरह एस-6 स्तर से ही पात्रता सुनिश्चित की जाए।

इस्पात प्राधिकरण में पर्यवेक्षी वर्ग (सुपरवाइजरी कैडर) का गठन किया जाए ताकि संयंत्र को वर्तमान में हो रहे नुकसान को रोका जा सके।

बेहरा जी ने धैर्यपूर्वक सभी बिंदुओं को सुना और सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, डिप्लोमा इंजीनियर्स संयंत्र के लिए अतिआवश्यक समूह है। ओर प्लांट को चलाने व संयंत्र हित में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, उन्होंने इन सभी विषयों पर गंभीरता से विचार करने व डिप्लोमा इंजीनियर्स के साथ अपने बोकारो स्टील प्लांट के अनुभव साझा किए।

उन्होंने “टीम भावना और आपसी तालमेल व टीम बिल्डिंग के लिए स्पोर्ट्स को अतिआवश्यक बताया व साथ ही, ठेका कर्मियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार, सुरक्षा उपाय, कौशल विकास तथा समान अवसर पर जोर दिया।

इसके साथ ही, श्री बेहरा ने उत्पादन में वृद्धि (रैम्प अप) की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और यूआरएम सहित बाकी मिल्स का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक के अंत में एसोसिएशन द्वारा उन्हें आगामी इंजीनियर्स डे के लिए अग्रिम आमंत्रण दिया गया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने श्री बेहरा जी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं तथा एसोसिएशन की डायरी व गमला उपहारस्वरूप भेंट किया गया।

एसोसिएशन का संकल्प

डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन ने पुनः दोहराया कि वह न केवल अपने सदस्यों के कैरियर विकास और अधिकारों की रक्षा हेतु निरंतर प्रयासरत रहेगा, बल्कि ठेका कर्मियों के कल्याण, पर्यावरण रक्षा की दिशा में भी पूरी निष्ठा से कार्य करेगा। एसोसिएशन का लक्ष्य है कि सभी मिलकर सुरक्षित, उत्पादक और सामूहिक सहयोग पर आधारित कार्यसंस्कृति का निर्माण करें, जिससे संगठन की प्रगति और देश की औद्योगिक शक्ति को नई ऊँचाइयाँ मिलें।

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