“खरना की रात” में नहाया बिहार : घर-घर में छठी मइया का गीत, घाटों पर सजावट का उत्सव!

पटना / संदीप सिंह: बिहार में लोकआस्था के महापर्व छठ की दूसरी संध्या यानी “खरना की रात” आज पूरे उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाई जा रही है।
पूरा बिहार आज सचमुच प्रकाश, भक्ति और अनुशासन के अद्भुत संगम में डूबा हुआ है।
घरों में गुड़ और चावल की खीर की सुगंध फैली हुई है, घाटों पर दीपों की कतारें जगमगा रही हैं, और हर गली में छठी मइया के गीतों की स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं।


🌙 खरना — आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक

छठ पर्व के तीसरे दिन यानी खरना की पूजा व्रतियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दिन भर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद बनाकर सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है।
इस प्रसाद को व्रती परिवार और पड़ोस के लोगों के साथ साझा करते हैं।

गाँवों और शहरों में आज हर घर में भक्ति का वही दृश्य देखने को मिला —
कहीं व्रती मिट्टी के चूल्हे में चावल पकाते नज़र आए, तो कहीं बच्चे माँ की थाली में प्रसाद सजाने में लगे थे।
हर कोई इस क्षण को पवित्र, शुद्ध और भावनात्मक मानकर पूजा में शामिल हुआ।


🪔 घाटों पर सजावट और सफाई में जुटे लोग

बिहार के तमाम जिलों में घाटों को सजाने-संवारने का कार्य रातभर जारी है।
पटना के कुर्जी, दीघा, नेहरू घाट से लेकर मुजफ्फरपुर के बुढ़ियाघाट, दरभंगा के घनश्यामपुर घाट और गया के फल्गु तट तक — हर जगह युवाओं की टोली सजावट में जुटी है।

नदी किनारे बांस और केले के पत्तों से बने तोरण द्वार, रंग-बिरंगी झालरों और दीपों से रोशन घाट — हर जगह भक्ति का मेला लगा है।
लोगों का कहना है —

“छठ में मेहनत नहीं लगती, बस आनंद मिलता है। घाट को सजाना भी पूजा का हिस्सा है।”


👥 प्रशासन सतर्क, व्यवस्था चुस्त

खरना की रात को देखते हुए जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों ने भी विशेष तैयारियाँ की हैं।
घाटों की सफाई, बिजली व्यवस्था, बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती और मेडिकल टीम की निगरानी की गई है।
पुलिस बल और स्वयंसेवी संगठन मिलकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा में लगे हुए हैं।

कई जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद स्थल निरीक्षण किया और स्थानीय समितियों के साथ बैठकें कीं।


📹 खबर आलोक टीम की विशेष कवरेज

खबर आलोक की टीम ने आज पटना, गया, सीवान और दरभंगा जिलों में घूमकर घाटों की तैयारियों और श्रद्धालुओं की भावनाएँ कैमरे में कैद कीं।
टीम ने कई परिवारों से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि खरना की रात सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने का पर्व है।

एक व्रती महिला ने बताया —

“हम साल भर छठ का इंतज़ार करते हैं। जब खरना की रात आती है, तो लगता है कि छठी मइया खुद हमारे घर में आकर आशीर्वाद दे रही हैं।”


🌏 बिहार से लेकर विदेशों तक छठ की लहर

दिल्ली, मुंबई, सूरत, रांची, कोलकाता, लखनऊ से लेकर लंदन, न्यूयॉर्क और दुबई तक बसे बिहारियों ने भी आज खरना की पूजा की।
प्रवासी समुदाय ने अपने-अपने घरों और स्थानीय झीलों के किनारे पूजा कर बिहार की मिट्टी से जुड़ेपन को महसूस किया।



✍️ निष्कर्ष

“खरना की रात” बिहार की उस लोकभावना का प्रतीक है जो हर वर्ग, हर जाति और हर समुदाय को एक सूत्र में बाँध देती है।
जहाँ आज एक ओर चुनावी राजनीति अपने रंग में है, वहीं दूसरी ओर छठ मइया का यह पर्व बिहार की असली पहचान को रोशन कर रहा है —
आस्था, अनुशासन और एकता का बिहार।

जय छठी मइया 🙏 | जय बिहार 🌾 | खबर आलोक टीम मैदान में 🇮🇳


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