ऐसा कमाल मबाविवि में ही संभव है।

मबाविवि जिला दुर्ग की एक निलंबित पर्यवेक्षक को रायपुर जिला एकीकृत परियोजना कार्यालय आरंग में पदस्थ बताते हुए नियम विपरीत ट्रांसफर किया गया है। जबकि निलंबित अवधि में कर्मचारियों अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।
मजे की बात ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद दुर्ग की निलंबित कर्मचारी को आरंग परियोजना अधिकारी के द्वारा कार्यमुक्त भी किया गया। जबकि निलंबन अवधि में आरंग परियोजना कार्यालय उसका हेड क्वाटर मात्र था न कि मूल पद स्थापना स्थान।
चूंकि मबाविवि का पर्यवेक्षक पद कार्यपालिक पद है और स्थानांतरण नीति 2025 के अनुसार कार्यपालिक कर्मचारियों का स्थानांतरण का अधिकार केवल विभागीय मंत्रियों को हैं। विभागीय मंत्री भी निलंबित कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं कर सकते। मतलब संबंधित कर्मचारी के द्वारा महिला एवं बाल विकास मंत्री के पास अपने आवेदन में गलत व भ्रामक जानकारी
प्रस्तुत की गई है।
इसलिए इस मामले में जितने भी आदेश हुए हैं उसमें उपर से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

उल्लेखनीय है कि 28 दिसंबर 2020 को कलेक्टर के दुर्ग के द्वारा कर्मचारी को निलंबित करने की अनुशंसा की गई।

कलेक्टर के अनुशंसा पर एक माह के बाद 30 जनवरी 2021 को संचालक मबाविवि के द्वारा निलंबन का आदेश जारी किया गया।

निलंबन अवधि में परियोजना कार्यालय आरंग जिला रायपुर निर्धारित किया गया।

लगभग साढ़े चार वर्षों तक निलंबित रखा गया।

निलंबन अवधि में ही 25 जून 2025 को ट्रांसफर कर दिया गया।

निलंबित कर्मचारी को आरंग परियोजना अधिकारी के द्वारा कार्यमुक्त कर दिया गया।

निलंबित कर्मचारी को शंकर नगर परियोजना अधिकारी के द्वारा ज्वाइनिंग दे दी गई।

निलंबन कर्मचारी को शंकर नगर परियोजना अधिकारी के द्वारा सेक्टर एलाट कर दिया गया।

ट्रांसफर आदेश जारी होने के लगभग एक माह के बाद 21 जुलाई को संचालक ने निलंबन समाप्त करने के आदेश जारी किया। बहाली आदेश में कर्मचारी को किस जिला के किस सेक्टर/परियोजना के लिए बहाल किया जाता है इसका उल्लेख नहीं है।

बहाली आदेश की प्रतिलिपि कर्मचारी को शंकर नगर परियोजना रायपुर के पते पर दी गई है। जो प्रमाणित करता है कि कर्मचारी का स्थानांतरण नियम विपरीत निलंबन अवधि में हुआ है और उस निलंबित कर्मचारी को सेक्टर भी आबंटित किया जा चुका है।

इतना ही नहीं संचालक के द्वारा 30 जनवरी 2021 से लेकर सम्पूर्ण निलंबन अवधि को कार्य मानते हुए वेतन भुगतान के आदेश। 4 वर्ष 7 माह को कर्तव्य पर उपस्थित माना गया है। मतलब साढ़े चार वर्षों का वेतन भुगतान किया जाएगा
कलेक्टर के द्वारा तमाम सबूत के साथ पर्यवेक्षक को निलंबित करने की अनुशंसा की गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी स्तर के लोगों के द्वारा जांच किया गया और कलेक्टर के अनुशंसा को गलत साबित करते हुए बहाल करने का प्रस्ताव