जीवन में कितना भी धन-संग्रह कर लो, अंत में निधन ही होता है
आर्य समाज मंदिर सेक्टर-6, भिलाई में चार दिवसीय वार्षिक उत्सव का शुभारंभ वैदिक परंपराओं के अनुरूप सत्संग, ऋग्वेद पारायण महायज्ञ एवं सुमधुर भजनों के साथ हो गया। 08 से 11 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस आयोजन के पहले दिन मंदिर परिसर श्रद्धा, अनुशासन और वैदिक चेतना से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ गुरुवार संध्या को सियान सदन, नेहरू नगर से किया गया।
उत्सव में यज्ञ ब्रह्मा के रूप में आगरा से पधारे आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ महायज्ञ संपन्न कराया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि मानव जीवन को शुद्ध करने, समाज में सद्भाव स्थापित करने और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने मानवता, सत्य और परोपकार को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।

आज के सत्संग में वैदिक विद्वान डॉ. अजय आर्य जी ने जीवन की नश्वरता पर प्रभावशाली विचार रखते हुए कहा कि “मनुष्य जीवन में कितना भी धन-संग्रह क्यों न कर ले, अंततः उसे इस संसार से विदा होना ही पड़ता है। इसलिए जीवन का वास्तविक उद्देश्य धन नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और सदाचार होना चाहिए।” उनके विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर दिल्ली से पधारे भजन उपदेशक कंचन कुमार जी ने ईश्वर भक्ति से परिपूर्ण सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं गुरुकुल आश्रम आमसेना से पधारी वेदपाठी ब्रह्मचारिणियों द्वारा वैदिक मंत्रपाठ किया गया। कार्यक्रम के दौरान धर्माचार्य पं. अंकित शर्मा जी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
आज आयोजित यज्ञ में प्रधान अवनी भूषण पूरंग, उपप्रधान रवि आर्य, मंत्री प्रवीण गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष अरुण ग्रोवर सहित समाजजनों ने आहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की।
उत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः महायज्ञ, दिन में सत्संग-प्रवचन तथा सायंकाल भजन एवं वैदिक विचारों का आयोजन किया जा रहा है। उत्सव का समापन रविवार 11 जनवरी को पूर्णाहुति, प्रवचन, आर्य वीर दल के शक्ति प्रदर्शन एवं ऋषि लंगर के साथ किया जाएगा।